लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ किया है कि अमेरिका में इजराइल के साथ जो बातचीत चल रही है, उसका अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह दोनों प्रक्रियाएं पूरी तरह अलग हैं।

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यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान ने अपनी 107 दिनों की जंग को खत्म करने के लिए एक समझौता किया है। इस ऐतिहासिक डील पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में दस्तखत होने की उम्मीद है। इसी दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इजराइल द्वारा लेबनान में किए गए हमलों की आलोचना की और प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से अधिक जिम्मेदारी से काम करने को कहा।

इस पूरे मामले में ईरान और अमेरिका के बयानों में अंतर देखा गया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने दावा किया कि लेबनान में युद्ध को खत्म करना और इजराइल की वहां से वापसी अमेरिका-ईरान समझौते का एक जरूरी हिस्सा है। लेकिन अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात को गलत बताया। अधिकारी ने साफ किया कि इजराइल का लेबनान से हटना इस समझौते की कोई शर्त नहीं है और इजराइल को Hezbollah के हमलों से अपना बचाव करने का पूरा अधिकार है।

वहीं Hezbollah की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक, शांति समझौते के ऐलान के बाद से उन्होंने कोई सैन्य ऑपरेशन नहीं किया है। उनका कहना है कि वे इस युद्धविराम का पालन तभी तक करेंगे जब तक इजराइल नियमों को मानेगा। साथ ही उन्होंने लेबनान में इजराइल की अपनी मर्जी से आवाजाही करने के अधिकार को खारिज कर दिया है।

राष्ट्रपति Joseph Aoun ने पहले उम्मीद जताई थी कि अमेरिका और ईरान की यह डील इजराइल और Hezbollah के बीच चल रहे संघर्ष को पूरी तरह खत्म कर देगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेबनान की सुरक्षा और शांति पूरे क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए बहुत जरूरी है।