लेबनान और इसराइल के बीच शांति लाने के लिए अमेरिका ने एक बड़ी कोशिश की है। 14 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio की मेजबानी में दोनों देशों के दूतों के बीच सीधी बातचीत शुरू हुई। इसे पिछले कई दशकों की सबसे महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच एक स्थायी शांति समझौता कराना है।

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अमेरिका और इसराइल का इस बातचीत पर क्या स्टैंड है?

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस बैठक को एक ऐतिहासिक अवसर बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें समय लगेगा और इसका मुख्य लक्ष्य हिजबुल्लाह के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करना है। दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि जब तक सुरक्षा पूरी तरह बहाल नहीं होती, सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इसराइल का पूरा जोर हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने और एक ठोस शांति समझौते पर है।

लेबनान और हिजबुल्लाह ने क्या प्रतिक्रिया दी है?

लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun का कहना है कि सबसे पहले युद्धविराम (ceasefire) होना चाहिए, क्योंकि यही एकमात्र रास्ता है। लेबनान के प्रतिनिधियों ने साफ किया है कि वे तभी बातचीत करेंगे जब अमेरिका इसराइल पर युद्ध रोकने का दबाव बनाएगा। वहीं, हिजबुल्लाह ने वॉशिंगटन में होने वाली इन वार्ताओं को सिरे से खारिज कर दिया है। हिजबुल्लाह के मुताबिक यह कदम लेबनान के कानून और संविधान का उल्लंघन है और ऐसी बातचीत का कोई मतलब नहीं है।

बातचीत में शामिल मुख्य लोग और उनकी भूमिका

नाम/संस्था देश/भूमिका मुख्य बात
Marco Rubio US Secretary of State वार्ता की मेजबानी और शांति ढांचा तैयार करना
Joseph Aoun राष्ट्रपति, लेबनान पहले युद्धविराम की शर्त रखी
Benjamin Netanyahu PM, इसराइल हिजबुल्लाह को निशस्त्र करने की मांग
Yechiel Leiter राजदूत, इसराइल युद्धविराम की चर्चा करने से इनकार किया
Nada Hamadeh Moawad राजदूत, लेबनान लेबनान का प्रतिनिधित्व किया
हिजबुल्लाह सशस्त्र समूह बातचीत को बेकार और गैरकानूनी बताया