दक्षिण लेबनान में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां इसराइल ने एक ‘डबल-टैप’ हमला किया जिससे तीन पैरामेडिक्स की जान चली गई। इस हमले में एक छोटी बच्ची ने अपने पिता को खो दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह हमला अमेरिका द्वारा कराए गए सीज़फायर के दौरान हुआ।
लेबनान हमले में कितना नुकसान हुआ और क्या स्थिति है?
30 अप्रैल 2026 को हुए इस हमले में भारी तबाही हुई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शुरुआती तौर पर 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें दो बच्चे और पांच महिलाएं शामिल थीं। कुछ अन्य रिपोर्टों के मुताबिक इस दिन कम से कम 15 लोगों की जान गई। इस हमले में 23 लोग घायल हुए, जिनमें आठ बच्चे और सात महिलाएं थीं।
- कुल स्वास्थ्य कर्मी: लेबनान स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसराइल के आक्रमण के बाद से अब तक करीब 100 स्वास्थ्य कर्मी मारे जा चुके हैं।
- इमरजेंसी वर्कर: मरने वालों में से 95 लोग इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के कार्यकर्ता और वॉलंटियर थे।
- गाँवों का खाली होना: इसराइल की सेना ने 30 अप्रैल को ही लेबनान के 8 दक्षिणी गाँवों को खाली करने का आदेश दिया था।
UN और लेबनान सरकार का इस हमले पर क्या कहना है?
लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि सीज़फायर के बावजूद इसराइल लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहा है और आम नागरिकों, पैरामेडिक्स और मानवीय संगठनों को निशाना बना रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसराइल पर दबाव बनाने की मांग की।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस मामले में गंभीर चिंता जताई है। UN के मानवाधिकार उच्चायुक्त Volker Turk ने 25 अप्रैल को कहा था कि अगर हथियारों के गलत इस्तेमाल का खतरा हो, तो देश उनकी सप्लाई रोक दें। UN की एक रिपोर्ट में कहा गया कि मेडिकल कर्मियों पर सीधे हमले करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और यह युद्ध अपराध के दायरे में आ सकता है। वहीं, इसराइल की सेना ने पहले कहा था कि वह केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता है और उसे रेड क्रॉस कर्मियों की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लेबनान में पैरामेडिक्स की मौत कैसे हुई
30 अप्रैल 2026 को इसराइल ने एक ‘डबल-टैप’ हमला किया। इसमें तीन पैरामेडिक्स मारे गए, जो बचाव कार्य में जुटे थे। यह हमला सीज़फायर के दौरान हुआ था।
क्या मेडिकल कर्मियों पर हमला करना कानूनी है
नहीं, अंतरराष्ट्रीय कानूनों और सम्मेलनों के तहत पैरामेडिक्स, एंबुलेंस और स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी सुरक्षा दी गई है। उन्हें जानबूझकर निशाना बनाना युद्ध अपराध माना जाता है।