Lebanon और Israel के बीच बातचीत का दावा, ट्रंप ने कहा था होगी बात लेकिन लेबनान ने किया इनकार
इज़राइल और लेबनान के बीच शांति की कोशिशें चल रही हैं और इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बातचीत होगी. हालांकि लेबनान के एक अधिकारी ने इस खबर का खंडन किया है और कहा है कि उन्हें ऐसी किसी कॉल की जानकारी नहीं है. इस वजह से अब दुनिया की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या वाकई में दोनों देश करीब आ रहे हैं.
ट्रंप ने क्या दावा किया और लेबनान का क्या कहना है?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बताया था कि 16 अप्रैल को इज़राइल और लेबनान के नेता 34 साल में पहली बार आपस में बात कर सकते हैं. ट्रंप ने कहा कि वह दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन लेबनान के एक अधिकारी ने Al Jazeera को बताया कि उन्हें ऐसी किसी कॉल या वाशिंगटन में दोबारा होने वाली राजदूतों की मीटिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं है जिसका ज़िक्र ट्रंप ने अपने ट्वीट्स में किया था.
वाशिंगटन में हुई पहली मीटिंग में क्या हुआ?
14 अप्रैल को वाशिंगटन में दोनों देशों के राजदूतों की पहली सीधी मुलाकात हुई थी जिसे अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने होस्ट किया था. इस मीटिंग की मुख्य बातें इस प्रकार रहीं:
- लेबनान के राजदूत: उन्होंने चर्चा को सकारात्मक बताया लेकिन युद्धविराम और विस्थापित लोगों की वापसी पर ज़ोर दिया.
- इज़राइल के राजदूत: उन्होंने कहा कि Lebanon से Hezbollah के प्रभाव को खत्म करने पर दोनों पक्षों की राय एक जैसी रही.
- अमेरिका की भूमिका: Marco Rubio ने इसे एक ऐतिहासिक मुलाकात बताया और उम्मीद जताई कि इससे एक बड़ा शांति समझौता होगा.
शांति की राह में क्या मुख्य रुकावटें हैं?
दोनों देशों के बीच बातचीत तो शुरू हुई है लेकिन ज़मीनी हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं. इज़राइल का कहना है कि वह तब तक युद्धविराम नहीं करेगा जब तक Hezbollah के निशस्त्रीकरण का कोई ठोस प्लान नहीं बनता. वहीं लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने पहले ही कह दिया है कि किसी भी स्थायी शांति समझौते से पहले युद्धविराम होना ज़रूरी है. इस बीच दक्षिण लेबनान में हवाई हमले और झड़पें जारी रहीं.