अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में मंगलवार को लेबनान और इसराइल के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। यह दोनों देशों के बीच साल 1993 के बाद पहली बार हुई सीधी बातचीत है। इस बैठक का मकसद इलाके में शांति लाना है, लेकिन दोनों पक्षों की शर्तें बिल्कुल अलग हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio भी इस चर्चा का हिस्सा रहे।

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लेबनान और इसराइल की क्या हैं अलग-अलग मांगें?

लेबनान की सरकार चाहती है कि इस बातचीत से युद्ध पूरी तरह खत्म हो जाए। लेबनान ने मांग की है कि ceasefire की बात शुरू करने के लिए पहले हमलों को तुरंत रोका जाए। वहीं दूसरी ओर, इसराइल ने साफ कर दिया है कि वह हिजबुल्लाह के साथ किसी युद्धविराम पर चर्चा नहीं करेगा। इसराइल का कहना है कि हिजबुल्लाह को पूरी तरह निशस्त्र करना और उत्तरी सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।

हिजबुल्लाह ने बातचीत का विरोध क्यों किया?

हिजबुल्लाह ने इस सीधी बातचीत का कड़ा विरोध किया है। संगठन के वरिष्ठ अधिकारी वफीक सफा ने कहा कि वह इस बैठक से निकलने वाले किसी भी समझौते को नहीं मानेंगे। हिजबुल्लाह के महासचिव नईम कासिम ने लेबनान सरकार से इन talks को रद्द करने की मांग की। उनका कहना है कि बातचीत केवल 2024 के पुराने समझौते के तहत अप्रत्यक्ष रूप से होनी चाहिए।

हमलों और नुकसान का ताजा ब्यौरा क्या है?

बातचीत के बीच भी दक्षिणी लेबनान में हमले जारी रहे, जिससे जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। पिछले 24 घंटों और अब तक के आंकड़ों की जानकारी नीचे दी गई तालिका में है।

विवरण आंकड़े/जानकारी
लेबनान में हालिया मौतें (14 अप्रैल) 6 लोग मारे गए, 5 घायल
इसराइल का नुकसान 1 सैनिक की मौत, 3 घायल
कुल मौतें (लेबनान में) 2,089 से ज्यादा
कुल घायल (लेबनान में) 6,762 से ज्यादा
विस्थापित लोग 10 लाख से अधिक
मारे गए स्वास्थ्य कर्मी कम से कम 88
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.