लेबनान और इसराइल के बीच लंबे समय बाद संपर्क हुआ है। दोनों देशों के राजदूतों ने वाशिंगटन में फोन पर बातचीत की है, जिसमें अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई। अब अगले मंगलवार को अमेरिकी विदेश विभाग में दोनों पक्षों की आमने-सामने मुलाकात होगी। यह कदम युद्ध और खून-खराबे को रोकने की एक बड़ी कोशिश माना जा रहा है।

मीटिंग में क्या होगा और कौन शामिल है?

इस बातचीत में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहमति शामिल है। लेबनान के राजदूत नदा हमदाह-मुअवाद और इसराइल के राजदूत येचिएल लेइटर ने शुरुआती फोन कॉल के जरिए संपर्क साधा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रक्रिया में दिलचस्पी दिखाई है। यह पहली मीटिंग केवल तैयारी के लिए होगी, जिसमें आगे की बातचीत का रास्ता तय किया जाएगा।

बातचीत की मुख्य शर्तें और विवाद क्या हैं?

दोनों देशों के बीच कुछ बुनियादी मतभेद हैं, जिन्हें सुलझाना एक बड़ी चुनौती है:

  • इसराइल की मांग: प्रधानमंत्री नेतन्याहू चाहते हैं कि हिज़्बुल्लाह पूरी तरह से निशस्त्र हो जाए और दोनों देशों के बीच शांति संबंध बनें।
  • हिज़्बुल्लाह का रुख: हिज़्बुल्लाह ने साफ कहा है कि जब तक युद्धविराम नहीं होता और इसराइल लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाता, तब तक वह सीधी बातचीत के खिलाफ है।
  • अमेरिका और ईरान का विवाद: अमेरिका और इसराइल का मानना है कि ईरान के साथ होने वाला युद्धविराम लेबनान के मामले में लागू नहीं होगा, जबकि ईरान और पाकिस्तान का कहना है कि लेबनान इसमें शामिल है।

हाल के हमलों और हताहतों का क्या हाल है?

बातचीत की खबर के बीच भी लेबनान में इसराइल के हवाई हमले जारी रहे। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च से अब तक 1,953 लोग मारे जा चुके हैं और 6,303 लोग घायल हुए हैं। इसराइल ने इस बार फ्रांस को मध्यस्थता से बाहर रखा है, क्योंकि उसका मानना है कि फ्रांस एक निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं रहा।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com