लेबनान और इसराइल के बीच युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका के वाशिंगटन में बड़ी बैठक चल रही है। फ़्रांस ने मांग की है कि मौजूदा युद्धविराम को और बढ़ाया जाना चाहिए ताकि लंबे समय तक शांति बनी रहे। लेबनान सरकार इस बैठक में युद्धविराम की अवधि को एक महीने और बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

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लेबनान और इसराइल की बातचीत में क्या खास है?

लेबनान और इसराइल के दूत 23 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन में आमने-सामने बात कर रहे हैं। लेबनान चाहता है कि युद्धविराम को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया जाए। साथ ही लेबनान ने मांग की है कि इसराइल दक्षिणी गांवों में मकानों को तोड़ना बंद करे। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने कहा है कि इस बातचीत से हिंसा कम होगी और कब्जे वाले इलाकों से इसराइल की वापसी होगी।

फ़्रांस की इस मामले में क्या भूमिका रही?

फ़्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने दावा किया कि 10 दिन के इस युद्धविराम में फ़्रांस का बड़ा हाथ था। उन्होंने कहा कि अगर फ़्रांस बीच-बचाव नहीं करता तो शायद यह युद्धविराम और बातचीत संभव नहीं होती। हालांकि इसराइल इस बातचीत में फ़्रांस को दूर रखना चाहता है। फ़्रांस ने हिज़बुल्लाह पर यूएन शांति सैनिकों की हत्या का आरोप लगाकर इसे युद्ध अपराध बताया है।

इसराइल और हिज़बुल्लाह का क्या स्टैंड है?

इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि बातचीत से पहले हिज़बुल्लाह को निशस्त्र करना ज़रूरी है। दूसरी ओर हिज़बुल्लाह ने इन सीधी बातचीत का विरोध किया है और कहा कि वह किसी भी समझौते को नहीं मानेगा। हिज़बुल्लाह का मानना है कि यह युद्धविराम कूटनीति से नहीं बल्कि क्षेत्रीय दबाव के कारण हुआ है। इस बीच 22 अप्रैल 2026 को लेबनान में युद्धविराम के बाद सबसे ज़्यादा मौतें दर्ज की गईं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.