लेबनान और इसराइल के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए एक बड़ी कोशिश शुरू हुई है. 14 अप्रैल 2026 को वॉशिंगटन डीसी में दोनों देशों के राजदूतों की मुलाकात होगी. यह साल 1993 के बाद से दोनों देशों के बीच सबसे बड़े स्तर की सीधी बातचीत है, जिसका मकसद सैन्य हमलों को कम करना और तनाव घटाना है.

इस मीटिंग का मुख्य मकसद क्या है?

लेबनान के संस्कृति मंत्री Ghassan Salame ने बताया कि इस मुलाकात का लक्ष्य सैन्य गतिविधियों में ठहराव लाना है. उनका कहना है कि बातचीत के जरिए पहले एक छोटा ब्रेक या युद्धविराम (ceasefire) लाया जाए, ताकि आगे की चर्चा हो सके. लेबनान के विदेश मंत्री ने भी संकेत दिया है कि आमने-सामने की बातचीत से युद्धविराम की मांग को मजबूती मिलेगी.

हिजबुल्लाह और इसराइल की क्या राय है?

इस बातचीत को लेकर दोनों तरफ अलग-अलग बातें सामने आई हैं. हिजबुल्लाह के नेता Naim Qassem ने इस बैठक का पूरी तरह विरोध किया है और इसे बेकार बताया है. उन्होंने साफ कहा कि उनका संगठन इसराइल के खिलाफ लड़ना जारी रखेगा और इस मीटिंग से निकलने वाले किसी भी समझौते को नहीं मानेगा. वहीं, इसराइल ने कहा है कि वह सिर्फ युद्धविराम पर बात नहीं करेगा. प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हिजबुल्लाह के हथियारों को पूरी तरह खत्म करना और एक स्थायी शांति समझौता करना है.

महत्वपूर्ण घटनाक्रम और विवरण

तारीख/पक्ष मुख्य जानकारी
2 मार्च 2026 इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष की शुरुआत हुई
13 अप्रैल 2026 संस्कृति मंत्री ने ठहराव की बात की, हिजबुल्लाह ने मीटिंग को नकारा
14 अप्रैल 2026 वॉशिंगटन डीसी में राजदूतों की मुलाकात तय हुई
14 अप्रैल 2026 इसराइल ने दक्षिणी लेबनान के Bint Jbeil शहर पर हमला किया
अमेरिका बैठक के लिए जगह और सुविधा मुहैया करा रहा है
कनाडा और जर्मनी इसराइल से हमले रोकने और कूटनीति अपनाने की अपील की