लेबनान के अल-तिरी गांव में इसराइली सेना के हवाई हमले में पत्रकार अमल खलील की जान चली गई. यह घटना तब हुई जब दोनों देशों के बीच ceasefire लागू था. अल जजीरा और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में उनकी साथी पत्रकार ज़ैनब फराज भी गंभीर रूप से घायल हुई हैं. इस घटना के बाद लेबनान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी गुस्सा देखा जा रहा है.

क्या था पूरा मामला और कैसे हुई मौत?

अमल खलील ‘अल-अखबार’ अखबार के लिए काम करती थीं और उनकी उम्र 43 साल थी. लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसराइल ने पहले एक हमला किया और फिर दूसरे हमले में उस घर को निशाना बनाया जहां अमल और उनकी साथी छिपी थीं. मलबे से उनका शव 22 अप्रैल की आधी रात को निकाला गया. बताया जा रहा है कि जब बचाव कर्मी उन्हें बचाने पहुंचे तो उन पर फायरिंग की गई जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हुई.

लेबनान और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने क्या कहा?

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इसे युद्ध अपराध बताया है. उनका कहना है कि पत्रकारों को निशाना बनाना सच को छुपाने की एक कोशिश है. कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जताई है. CPJ का कहना है कि मेडिकल टीम को रोकना और एक ही जगह पर बार-बार हमला करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का बड़ा उल्लंघन है.

इसराइल का इस घटना पर क्या स्टैंड है?

इसराइल की सेना (IDF) ने पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाने की बात से इनकार किया है. उनका दावा है कि गांव के कुछ लोगों ने ceasefire के नियमों को तोड़ा था, जिससे उनके सैनिकों की जान को खतरा हुआ. IDF ने कहा कि यह पूरा मामला अभी जांच के दायरे में है. हालांकि, लेबनान के सूचना मंत्री पॉल मोरकोस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया है.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.