ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि लेबनान में शांति लाना तब तक मुमकिन नहीं है जब तक इसमें ईरान की भूमिका न हो। यह बात उन्होंने 5 जुलाई 2026 को IRNA न्यूज़ एजेंसी के माध्यम से कही। ईरान का मानना है कि मध्य पूर्व के हालात सुधारने में उसका दखल बहुत ज़रूरी है।
यह बयान तब आया जब Ghalibaf तेहरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के अंतिम संस्कार के दौरान Hamas की लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख Mohammed Darwish से मिले थे। इस मुलाकात में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई और ईरान ने साफ़ किया कि वह अपने सहयोगियों के साथ खड़ा है।
अमेरिका के साथ रिश्तों पर बात करते हुए Ghalibaf ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए ‘इस्लामाबाद समझौते’ (MoU) को लागू करना मुश्किल ज़रूर है लेकिन यह संभव है। उन्होंने शर्त रखी कि कूटनीति के दौरान युद्ध में मिली जीतों को बरकरार रखना होगा। साथ ही उन्होंने ज़ोर दिया कि इस समझौते में क्षेत्रीय देशों की सीमाओं की सुरक्षा और ईरान के सहयोगियों के खिलाफ युद्ध खत्म करने की शर्तें होनी चाहिए।
गालिबाफ ने इस दौरान बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने साफ़ तौर पर कह दिया कि ईरान कभी भी अमेरिका के साथ शांति समझौता नहीं करेगा और न ही वह Israel को मान्यता देगा। उनके मुताबिक, लेबनान की संप्रभुता और वहाँ ज़ायोनी शासन के कब्जे को खत्म करना प्राथमिकता है।
इससे पहले जून 2026 में भी उन्होंने कहा था कि लेबनान में युद्ध खत्म करना और विस्थापित लोगों की वापसी सुनिश्चित करना इस्लामाबाद समझौते का एक मुख्य हिस्सा है। अप्रैल में उन्होंने यह भी कहा था कि लेबनान में सीज़फायर तभी होगा जब Hezbollah और ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ मजबूती से डटे रहेंगे।
दूसरी तरफ, 26 जून 2026 को Lebanon, Israel और अमेरिका ने एक त्रिपक्षीय ढांचा समझौता (Trilateral Framework Agreement) साइन किया था। इस समझौते का मकसद लेबनान में पूरी तरह शांति लाना और लेबनानी सेना का नियंत्रण बहाल करना है। लेकिन ईरान इस कोशिश को अपने प्रभाव को कम करने की एक चाल के रूप में देखता है।
