लेबनान में इस वक्त राजनीतिक माहौल काफी गर्माया हुआ है. राष्ट्रपति जोसेफ औन ने हिज़्बुल्लाह पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें गद्दार कहा है. राष्ट्रपति का कहना है कि जो लोग विदेशी हितों को पूरा करने के लिए अपने देश को युद्ध की आग में झोंकते हैं, वही असली गद्दार होते हैं.

ℹ: भारत का बांग्लादेश के लिए नया बड़ा फैसला, Dinesh Trivedi बनेंगे हाई कमिश्नर, बदल गई पूरी रणनीति.

राष्ट्रपति जोसेफ औन ने हिज़्बुल्लाह पर क्या आरोप लगाए?

27 अप्रैल 2026 को दक्षिणी लेबनान के एक प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए राष्ट्रपति Joseph Aoun ने कहा कि विदेशी फायदों के लिए देश को युद्ध में ले जाना विश्वासघात है. उन्होंने साफ किया कि इसराइल के साथ बातचीत करना गद्दारी नहीं है. राष्ट्रपति ने उन लोगों से सवाल किया कि जब उन्होंने युद्ध शुरू किया था, तब क्या उन्होंने देश की सहमति ली थी.

इसराइल के साथ बातचीत और हिज़्बुल्लाह का स्टैंड क्या है?

राष्ट्रपति औन चाहते हैं कि इसराइल के साथ युद्ध की स्थिति खत्म हो. इसके लिए वह 1949 के युद्धविराम जैसा कोई समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वह कोई भी अपमानजनक सौदा स्वीकार नहीं करेंगे. वहीं, हिज़्बुल्लाह के नेता Naim Qassem ने इसराइल के साथ सीधी बातचीत को एक बड़ा पाप बताया है. उन्होंने कहा कि ऐसी बातचीत से लेबनान अस्थिर हो जाएगा और उनका संगठन हथियार नहीं डालेगा.

लेबनान और इसराइल विवाद में अब तक क्या हुआ?

  • लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने 21 अप्रैल 2026 को कहा था कि उनकी सरकार हिज़्बुल्लाह से टकराव नहीं चाहती, लेकिन वह इसराइल के साथ बातचीत जारी रखेगी.
  • अमेरिका की मध्यस्थता से इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच 10 दिनों का युद्धविराम 24 अप्रैल 2026 से लागू हुआ था.
  • इन तमाम diplomatic कोशिशों के बीच 27 अप्रैल 2026 को इसराइली सेना ने बेका वैली में हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए.