लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने अमेरिका से मदद मांगी है ताकि इजराइल दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले इलाकों से पूरी तरह बाहर निकले। उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका इस बात का ध्यान रखेगा कि हाल ही में हुए समझौते का उल्लंघन न हो। इस कदम का मुख्य मकसद लेबनानी सेना (LAF) को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात करना है।
यह बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और राष्ट्रपति Aoun के बीच हुए एक फोन कॉल के बाद सामने आई। राष्ट्रपति Trump ने लेबनान और इजराइल के बीच हुए समझौते के लिए बधाई दी। इस समझौते को अमेरिका की मध्यस्थता में पूरा किया गया। राष्ट्रपति Aoun ने लेबनान की सरकारी संस्थाओं को दिए गए समर्थन के लिए अमेरिका का शुक्रिया अदा किया और समझौते को लागू करने की बात कही।
इस पूरे मामले की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- समझौते की जानकारी: 26 जून 2026 को वॉशिंगटन में लेबनान, इजराइल और अमेरिका के बीच एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट साइन हुआ। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इसे शांति की दिशा में पहला कदम बताया।
- मुख्य लक्ष्य: इस समझौते का मकसद लेबनान की संप्रभुता को वापस लाना और हिजबुल्लाह के हथियारों तथा उनके बुनियादी ढांचे को खत्म करना है।
- सेना की तैनाती: समझौते के मुताबिक इजराइल दो ‘पायलट क्षेत्रों’ से अपनी सेना हटाएगा, जिसके बाद लेबनानी सेना वहां अपना नियंत्रण लेगी।
- इजराइल का रुख: प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि जब तक हिजबुल्लाह पूरी तरह निहत्था नहीं हो जाता, तब तक इजराइल ज्यादातर कब्जे वाले इलाकों में मौजूद रहेगा।
- अमेरिकी आर्थिक मदद: अमेरिका ने मानवीय सहायता के लिए 100 मिलियन डॉलर और लेबनानी सेना के लिए 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा की मदद देने का वादा किया है।
सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख के लिए अमेरिका की मदद से एक सैन्य समन्वय समूह (MCG4L) बनाया गया है। हालांकि, हिजबुल्लाह ने इस समझौते का कड़ा विरोध किया है और इसके खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। हिजबुल्लाह का कहना है कि हथियार डालने की शर्त उनके अधिकारों के खिलाफ है।
राष्ट्रपति Trump ने जल्द ही राष्ट्रपति Aoun को वॉशिंगटन बुलाकर मीटिंग करने का संकेत दिया है।
