लेबनान में जारी युद्ध के बीच अफ्रीकी प्रवासी मजदूर बहुत मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। सरकारी शेल्टर और इमरजेंसी मदद केवल लेबनानी नागरिकों के लिए रखी गई है, जिससे विदेशी मजदूर बाहर रह गए हैं। ऐसे में कई लोग बिना छत और बिना खाने के संघर्ष कर रहे हैं और उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

लेबनान में प्रवासियों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है?

लेबनान के सरकारी शेल्टर और इमरजेंसी सहायता केंद्रों पर ‘केवल लेबनानी नागरिकों के लिए’ का बोर्ड लगा है। शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों में बने अस्थायी आवासों में प्रवासी मजदूरों और सीरियन नागरिकों के रहने पर रोक लगा दी है। इथियोपिया, सूडान और सिएरा लियोन जैसे देशों के मजदूर इस युद्ध में फंस गए हैं और उन्हें आधिकारिक मदद से दूर रखा गया है। अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रवासियों के पास लेबनानी आईडी नहीं है, इसलिए उन्हें शेल्टर मिलने में दिक्कत आ रही है।

विदेशी मजदूरों की मदद के लिए कौन सी संस्थाएं आगे आईं?

जब सरकारी रास्ते बंद हुए, तो कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने मदद शुरू की। Doctors Without Borders (MSF) स्वास्थ्य सेवाएं और जरूरी सामान बांट रहा है, वहीं IOM प्रवासियों की सुरक्षा और उन्हें वापस भेजने के काम में लगा है। Oxfam और Caritas Lebanon साफ पानी, भोजन और हाइजीन किट उपलब्ध करा रहे हैं। इसके अलावा, बंशी युमिर जैसी पूर्व इथियोपियाई घरेलू सहायिका ने अपना NGO शुरू किया है ताकि वे अपने साथी प्रवासियों की मदद कर सकें।

कफाला सिस्टम और दूतावासों की कमी का क्या असर हुआ?

लेबनान का कफाला सिस्टम मजदूरों को उनके मालिकों पर निर्भर रखता है, जिससे उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता है और वे बिना इजाजत देश नहीं छोड़ पाते। कई अफ्रीकी देशों के दूतावास लेबनान में बहुत सीमित हैं, जिससे मजदूरों को अपने देश वापस जाने या कानूनी मदद पाने में समस्या हो रही है। 9 अप्रैल 2026 को ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेत कई देशों ने इस मानवीय संकट पर चिंता जताई और युद्ध रोकने की अपील की ताकि सहायता कर्मियों और प्रवासियों की जान बचाई जा सके।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.