दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम और बेंगलुरु जैसे महानगरों की चकाचौंध भरी जिंदगी के पीछे एक गहरा सन्नाटा छिपा हुआ है। यहाँ भीड़ तो बहुत है, लेकिन अपना कहने वाला कोई पास नहीं है। काम के दबाव और करियर की दौड़ में लोग अपने परिवारों और पुराने दोस्तों से दूर होते जा रहे हैं। इसी अकेलेपन (Loneliness) से निपटने के लिए अब भारत के बड़े शहरों में एक बेहद अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग अपना अकेलापन दूर करने के लिए अब ‘किराये पर साथी’ (Rent-a-Friend) जैसी सेवाओं का सहारा ले रहे हैं। यह अवधारणा अब केवल पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय मेट्रो शहरों में भी तेजी से पैर पसार रही है।

अकेलेपन का इलाज: अब सिर्फ बात करने, कॉफी पीने और साथ घूमने के लिए ‘किराये पर दोस्त’ ढूंढ रहे हैं लोग

नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में घर से दूर रहने वाले युवाओं और कामकाजी पेशेवरों के लिए सप्ताहांत या छुट्टियों का दिन काटना मुश्किल हो जाता है। सोशल मीडिया पर हजारों दोस्त होने के बावजूद, असल जिंदगी में उनके पास ऐसा कोई नहीं होता जिसके साथ बैठकर वे दो पल सुकून के बिता सकें। इसी खालीपन को भरने के लिए ‘रेंट-ए-फ्रेंड’ सर्विसेज सामने आई हैं। इन सेवाओं के जरिए लोग किसी अजनबी को अपना दोस्त बना सकते हैं, जिसके साथ वे मूवी देखने जा सकते हैं, लंच कर सकते हैं, या किसी पारिवारिक समारोह में ‘प्लस वन’ के तौर पर ले जा सकते हैं। इसका मकसद सिर्फ एक अच्छा साथ पाना है।

वर्चुअल दुनिया से मोहभंग: डिप्रेशन और मानसिक तनाव से बचने के लिए अब स्क्रीन नहीं, इंसानी अहसास की तलाश

लंबे समय तक सामाजिक अलगाव में रहने का सीधा असर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अकेलापन अब केवल एक भावनात्मक स्थिति नहीं है, बल्कि यह डिप्रेशन और गंभीर तनाव का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। लोग अब यह महसूस करने लगे हैं कि डिजिटल चैट और वीडियो कॉल उस सुकून की जगह नहीं ले सकते जो आमने-सामने बैठकर बात करने से मिलता है। यही वजह है कि लोग अब ऑनलाइन दोस्तों की बजाय ऑफलाइन जुड़ाव (Offline Connection) को तरजीह दे रहे हैं। वे पैसे खर्च करके ही सही, लेकिन एक ऐसा साथी चाहते हैं जो उनकी बातें सुने और उन्हें जज न करे।

सुरक्षा और दायरे: सख्त नियमों के साथ सिर्फ ‘प्लेटोनिक’ रिश्ते और भरोसे पर टिका है यह पूरा कांसेप्ट

जैसे-जैसे इन सेवाओं की मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षा और निजता को लेकर भी सवाल उठना लाजमी है। हालांकि, यह सेवाएं मुहैया कराने वाले प्लेटफॉर्म सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हैं। इन मुलाकातों के नियम बेहद सख्त होते हैं। यह साफ तौर पर बताया जाता है कि ‘किराये का दोस्त’ केवल सामाजिक गतिविधियों और बातचीत के लिए है। इसमें किसी भी तरह के शारीरिक संपर्क या रति-संबंधों (Romantic Relationships) की कोई गुंजाइश नहीं होती। कंपनियां दावा करती हैं कि वे क्लाइंट और साथी दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, ताकि लोग बिना किसी डर या दबाव के एक-दूसरे के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिता सकें।

GulfHindi Desk

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