दुनिया भर में अब सस्ते ड्रोन ने युद्ध का तरीका बदल दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव और यूक्रेन की जंग ने यह साफ़ कर दिया कि महंगे हथियार अब छोटे और सस्ते ड्रोन के हमलों के सामने बेबस हो रहे हैं। इस वजह से अब दुनिया के ताकतवर देश अपनी हवाई सुरक्षा की रणनीति को पूरी तरह बदल रहे हैं।

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महंगे मिसाइल और सस्ते ड्रोन का मुकाबला

पुराने एयर डिफेंस सिस्टम बड़े विमानों और महंगी मिसाइलों को रोकने के लिए बनाए गए थे। लेकिन अब ईरान के Shahed जैसे सस्ते ड्रोन बड़ी संख्या में हमला करते हैं, जिससे डिफेंस सिस्टम कमजोर पड़ जाते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक सस्ते ड्रोन को गिराने के लिए जो मिसाइल इस्तेमाल होती है, उसकी कीमत ड्रोन से कई गुना ज़्यादा होती है।

हथियार का नाम अनुमानित कीमत
Shahed ड्रोन (ईरान) 20,000 से 50,000 डॉलर
Patriot मिसाइल (USA) 30 लाख से 40 लाख डॉलर
LUCAS इंटरसेप्टर ड्रोन 15,000 डॉलर
लेजर हथियार (प्रति शॉट) 10 से 50 डॉलर

बचाव के लिए नई तकनीक की तैयारी

अब दुनिया के देश सस्ते खतरों को सस्ते हथियारों से रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए कुछ नई तकनीकें अपनाई जा रही हैं:

  • Directed-Energy Weapons (DEW): इसमें हाई-पावर लेजर और माइक्रोवेव सिस्टम का इस्तेमाल होता है, जिसका एक शॉट बहुत सस्ता पड़ता है। अमेरिका ने इसके लिए अपने पांच सैन्य ठिकानों को चुना है।
  • Electronic Warfare (EW): इसमें Dronebuster 4 जैसे हथियारों का इस्तेमाल ड्रोन के सिग्नल तोड़ने के लिए किया जा रहा है।
  • Interceptor Drones: यूक्रेन और अमेरिका ने ऐसे सस्ते ड्रोन बनाए हैं जो हवा में ही दूसरे ड्रोन को टक्कर मारकर गिरा देते हैं।

बड़े अधिकारियों की चेतावनी और नियम

NATO कमांडर Stringer ने चेतावनी दी कि अब केवल महंगे जेट और मिसाइलों के भरोसे नहीं रहा जा सकता, क्योंकि अब हवा पर पूरी तरह कंट्रोल पाना मुश्किल हो गया है। वहीं, अमेरिकी आर्मी सचिव Dan Driscoll ने कहा कि अब अमेरिका सस्ते ड्रोन का मुकाबला सस्ते सिस्टम से करेगा ताकि खर्च कम हो सके।

U.S. Joint Interagency Task Force 401 (JIATF 401) के डायरेक्टर Brigadier General Matt Ross ने बताया कि ड्रोन को रोकना अब सिर्फ युद्ध का हिस्सा नहीं बल्कि देश की अंदरूनी सुरक्षा के लिए भी ज़रूरी है। इसके लिए मार्च 2026 में नई गाइडलाइन्स भी जारी की गईं।

बजट में भारी बढ़ोतरी

ड्रोन के खतरों को देखते हुए अमेरिका के रक्षा विभाग ने अपने 2027 के बजट में ड्रोन और उनके बचाव के सिस्टम के लिए 75 अरब डॉलर रखे हैं। यूरोपीय संघ (EU) ने भी 2019 में ड्रोन चलाने और उनके रजिस्ट्रेशन के लिए कड़े नियम लागू किए थे ताकि उनकी निगरानी रखी जा सके।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.