Madhya Pradesh: सोलर लगाने वालों को बड़ा झटका, हर महीने लग रहा 10 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फिक्स चार्ज।

मध्य प्रदेश में रूफटॉप सोलर पैनल लगवाने वाले लगभग 1.37 लाख बिजली उपभोक्ताओं को लगातार बिलिंग से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सोलर पैनल लगाने के बाद भी इन लोगों को हर महीने करीब 800 रुपये तक का बिजली बिल मिल रहा है, जिसकी मुख्य वजह फिक्स चार्ज का लगना है जो सोलर बिजली पैदा होने के बाद भी कम नहीं होता है। इस पूरे सिस्टम की वजह से राज्य के इन सोलर उपभोक्ताओं पर हर महीने कुल मिलाकर 10 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
सरकारी सब्सिडी और बिलिंग का गणित
केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई 'PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana' के तहत सोलर सिस्टम लगवाने के लिए भारी सब्सिडी दी जा रही है। अगर कोई नागरिक 3 किलोवाट या उससे ज्यादा क्षमता का सोलर सिस्टम लगवाता है, तो उसे सरकार की तरफ से 78,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता मिलती है। इस योजना के बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट PM Surya Ghar पर दी गई है। इसके बावजूद राज्य की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम द्वारा जो बिलिंग का तरीका अपनाया गया है, उसमें बिजली की खपत चाहे कितनी भी हो, उपभोक्ता को अनिवार्य रूप से फिक्स चार्ज, मीटर का किराया और सर्विस फीस चुकानी ही पड़ती है।
नियम और उपभोक्ताओं की मुश्किलें
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग की 2024 की MPERC RG-39 रेगुलेशन के तहत नेट मीटरिंग की सुविधा मिलती है। इसके जरिए लोग अपने घर में बनने वाली अतिरिक्त बिजली को वापस ग्रिड में भेजकर अपने बिजली बिल का खर्च कम कर सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद ये फिक्स चार्ज लगातार बने रहते हैं, जिसकी वजह से आम परिवारों के लिए बिजली का खर्च कम करना मुश्किल हो रहा है और सौर ऊर्जा का फायदा पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर उपभोक्ता समूहों और कई अधिकारियों ने मौजूदा बिलिंग सिस्टम की नए सिरे से जांच करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जो लोग अपने घरों में रिन्यूएबल एनर्जी यानी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें पुराने और गलत टैरिफ नियमों की वजह से बेवजह नुकसान नहीं झेलना चाहिए। इस मुद्दे के सामने आने के बाद राज्य में रहने वाले आम नागरिकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या रूफटॉप सोलर पैनल वाकई मध्यमवर्गीय परिवारों को हर महीने बिजली के बिल में बड़ी बचत देने में कामयाब हो पा रहे हैं या नहीं।