मक्का में एक बेहद खास और पवित्र धार्मिक रस्म पूरी की गई है. 30 जून 2026 को मक्का क्षेत्र के डिप्टी गवर्नर प्रिंस सऊद बिन मिशाल बिन अब्दुलअज़ीज़ ने पवित्र काबा की धुलाई की. यह पारंपरिक कार्य उन्होंने कस्टोडियन ऑफ द टू होली मॉस्क्स, किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ अल सऊद की तरफ से किया.
यह पूरी प्रक्रिया फज्र की नमाज़ के बाद शुरू हुई, जो इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक 15 मुहर्रम 1448 AH का दिन था. इस पूरी व्यवस्था की ज़िम्मेदारी General Authority for the Care of the Affairs of the Grand Mosque and the Prophet’s Mosque को सौंपी गई थी, जिन्होंने शुद्धता और पवित्रता के ऊंचे मानकों को बनाए रखा.
धुलाई की प्रक्रिया के तीन मुख्य चरण
काबा की धुलाई की रस्म को तीन अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया था:
- तैयारी: सबसे पहले ज़रूरी तकनीकी इंतज़ाम किए गए और काबा के दरवाज़े के पर्दे के निचले हिस्से को ऊपर उठाया गया ताकि किसवा (काले कपड़े) को बचाया जा सके. इसके बाद ज़मज़म पानी और खास ऊद तेल का मिश्रण तैयार किया गया.
- धुलाई: काबा की अंदरूनी दीवारों, खंभों और फर्श को खास कपड़ों से साफ किया गया. इसमें ज़मज़म पानी, ताएफ गुलाब जल, काबा वॉशिंग परफ्यूम और कस्तूरी (musk) के मिश्रण का इस्तेमाल हुआ.
- खुशबू और धूप: धुलाई के बाद दीवारों और कोनों पर ऊद तेल लगाया गया और अंदरूनी हिस्से में प्रीमियम बखूर की धूप दी गई.
काबा के फर्श को ज़मज़म पानी और गुलाब जल से धोया गया और फिर तौलिये और खजूर के पत्तों की मदद से हाथों से सुखाया गया.
इस मौके पर कई बड़े अधिकारी, इमाम, धार्मिक विद्वान, सऊदी अरब में तैनात इस्लामिक राजनयिक और काबा के रखवाले मौजूद थे. यह रस्म पूरी दुनिया के मुस्लिम समुदाय की एकता का प्रतीक मानी जाती है.
