इन्डोनेशिया के सुराबाया से हज यात्रियों की पहली फ्लाइट सऊदी अरब के लिए रवाना हो गई है। यह सफर ‘मक्का रूट पहल’ (Makkah Route Initiative) के तहत हुआ है, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिलेगी। इस साल इंडोनेशिया से सबसे ज्यादा 2,21,000 लोग हज के लिए जा रहे हैं, जो दुनिया में सबसे बड़ी संख्या है।

🚨: Pakistan और Iran के बीच बड़ी बैठक, PM शरीफ ने की शांति की बात, अमेरिका ने भी बढ़ाया युद्धविराम

क्या है मक्का रूट पहल और इससे यात्रियों को क्या फायदा होगा?

इस पहल का मकसद हज यात्रियों के सफर को आसान और आरामदायक बनाना है। अब यात्रियों का बायोमेट्रिक डेटा और ई-वीजा की प्रक्रिया उनके अपने ही देश में पूरी हो जाती है। पासपोर्ट की जांच और हेल्थ चेकअप भी एयरपोर्ट पर ही हो जाता है। सऊदी अरब पहुंचने के बाद यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर सिर्फ कुछ मिनट ही बिताने पड़ते हैं और वे सीधे बसों के जरिए अपने होटलों की ओर रवाना हो जाते हैं। उनके सामान की कोडिंग और सॉर्टिंग पहले से ही कर ली जाती है ताकि कोई परेशानी न हो।

हज 2026 के लिए क्या हैं नियम और समय सीमा?

इन्डोनेशिया से यात्रियों का पहला जत्था 22 अप्रैल 2026 को मदीना के लिए रवाना हुआ। दूसरा जत्था 7 मई 2026 से सीधे जेद्दा के लिए जाएगा। हज करने वाले सभी लोगों के लिए ‘नुसुक’ (Nusuk) प्लेटफॉर्म के जरिए आधिकारिक परमिट लेना जरूरी है। इसके बिना हज की अनुमति नहीं मिलेगी। इस बार यह सुविधा जकार्ता, सोलो और सुराबाया तीनों शहरों के यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई गई है।

सऊदी विजन 2030 और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल

सऊदी अरब के परिवहन और रसद सेवा मंत्री सालेह अल-जस्सेर ने इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने बताया कि इस साल हज सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है। यह पूरी योजना सऊदी विजन 2030 के ‘पिलग्रिम एक्सपीरियंस प्रोग्राम’ का हिस्सा है। इसमें सऊदी के विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और हज एवं उमराह मंत्रालय जैसे कई विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.