Makkah Route Initiative: तुर्की से सऊदी के लिए पहली फ्लाइट रवाना, अब एयरपोर्ट पर नहीं करना होगा इंतज़ार
सऊदी अरब ने हज 2026 के लिए मक्का रूट पहल की शुरुआत कर दी है. 18 अप्रैल 2026 को तुर्की के इस्तांबुल एयरपोर्ट से पहली फ्लाइट रवाना हुई जो मदीना के प्रिंस मोहम्मद बिन अब्दुलअजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची. इस पहल का मकसद हज यात्रियों के सफर को आसान बनाना है ताकि उन्हें सऊदी पहुंचने के बाद लंबी लाइनों में न लगना पड़े.
मक्का रूट पहल क्या है और इससे यात्रियों को क्या फायदा होगा?
इस पहल के जरिए हज यात्री अपने ही देश के एयरपोर्ट पर सऊदी अरब के एंट्री प्रोसेस पूरे कर सकते हैं. इसमें इलेक्ट्रॉनिक वीजा जारी करना, बायोमेट्रिक डेटा लेना और पासपोर्ट कंट्रोल जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. सबसे बड़ी राहत यह है कि यात्रियों का सामान एयरपोर्ट पर ही कोड और रजिस्टर कर लिया जाता है, जिसे सीधे मक्का और मदीना के होटलों में भेज दिया जाता है. सऊदी पहुंचने के बाद यात्रियों को सीधे बसों के जरिए उनके ठहरने की जगह पर ले जाया जाता है.
किन देशों के लिए शुरू हुई यह सुविधा और क्या हैं नए नियम?
सऊदी इंटीरियर मिनिस्ट्री ने इस साल इस सुविधा का विस्तार किया है. अब यह 10 देशों के 17 एंट्री पॉइंट्स पर उपलब्ध है. इस बार से सेनेगल और ब्रुनेई दारुस्सलाम को भी पहली बार इसमें जोड़ा गया है. सरकार ने यह भी साफ किया है कि बिना सही हज वीजा के यात्रा करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जाएगा.
| लाभार्थी देश | स्थिति |
|---|---|
| मोरक्को | शामिल |
| इंडोनेशिया | शामिल |
| मलेशिया | शामिल |
| पाकिस्तान | शामिल |
| बांग्लादेश | शामिल |
| तुर्की | शामिल |
| आइवरी कोस्ट | शामिल |
| सेनेगल | नया शामिल |
| ब्रुनेई दारुस्सलाम | नया शामिल |
यह प्रोजेक्ट किसके तहत लागू किया गया है?
मक्का रूट पहल को सऊदी विजन 2030 के ‘पिलग्रिम एक्सपीरियंस प्रोग्राम’ के हिस्से के रूप में चलाया जा रहा है. इसे इंटीरियर मिनिस्ट्री लीड कर रही है और इसमें विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, हज और उमराह मंत्रालय समेत कई सरकारी संस्थाएं शामिल हैं. इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने में stc group पार्टनर के तौर पर मदद कर रहा है ताकि यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी न हो.