मलेशिया की सरकार अब देश में डीजल के इस्तेमाल में बड़ा बदलाव करने जा रही है। वहां B50 बायोडीजल को लागू करने की संभावनाओं पर गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। सरकार मुख्य रूप से यह देख रही है कि मौजूदा ब्लेंडिंग डिपो को अपग्रेड करने में कितना खर्च आएगा और यह कितना व्यावहारिक होगा।

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मलेशिया के बागान और कमोडिटीज मंत्रालय (KPK) ने संसद को बताया कि उच्च बायोडीजल मिश्रण के लिए डिपो में बड़े बदलाव की जरूरत होगी। फिलहाल वहां के डिपो B50 मिश्रण तैयार करने के लिए सक्षम नहीं हैं क्योंकि वहां बायोडीजल स्टोर करने के लिए पर्याप्त टैंक नहीं हैं। इसे ठीक करने के लिए सरकार को भारी निवेश करना होगा।

सरकार का फिलहाल का लक्ष्य 2030 तक पूरे देश में B30 बायोडीजल का विस्तार करना है। इसके लिए कुछ चरण तय किए गए हैं। जून 2026 से प्रायद्वीपीय मलेशिया में B15 बायोडीजल का रोलआउट शुरू हो गया है। वहीं सारावाक, लाबुआन और लंगकावी जैसे इलाकों में B20 बायोडीजल का इस्तेमाल पहले से ही किया जा रहा है। ग्रामीण और क्षेत्रीय विकास मंत्री के मुताबिक मलेशिया पहले B20 पर शिफ्ट होगा और अगले दो से तीन साल में B50 की तरफ बढ़ सकता है।

इस बदलाव का मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत को कम करना है। वैश्विक तनाव की वजह से बाहरी देशों से आने वाले जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और अपनी ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। अब बायोडीजल को साधारण डीजल के मुकाबले सस्ता माना जा रहा है।

बायोडीजल और पाम तेल आपूर्ति का विवरण

विवरण डेटा/आंकड़े
2025 की कुल पाम तेल आपूर्ति 22.76 मिलियन टन
B30 कार्यक्रम के लिए सालाना जरूरत 1.60 मिलियन टन
कुल आपूर्ति का प्रतिशत (B30 के लिए) लगभग 7 प्रतिशत
बायोडीजल उत्पादन संयंत्रों की संख्या 19
कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 2.44 मिलियन टन
2025 में कुल बायोडीजल उत्पादन 1.3 मिलियन टन
राष्ट्रीय मिश्रण में उपयोग 1 मिलियन टन

मंत्रालय ने साफ किया है कि B30 कार्यक्रम को बढ़ाने से पाम तेल के निर्यात पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। मलेशियाई बायोडीजल एसोसिएशन (MBA) ने भी मांग की है कि ईंधन संकट से बचने के लिए इस प्रक्रिया को और तेज किया जाए। यह पूरा कदम देश की राष्ट्रीय परिवहन नीति और ऊर्जा संक्रमण रोडमैप के तहत उठाया जा रहा है।