भारत के मणिपुर राज्य में पिछले तीन सालों से चल रही जातीय हिंसा एक बार फिर तेज हो गई है। अप्रैल महीने में हुए एक बम धमाके ने पूरे इलाके में भारी तनाव पैदा कर दिया है। अब लोग इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें हो रही हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं।

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मणिपुर में हिंसा दोबारा क्यों शुरू हुई?

7 अप्रैल 2026 को बिष्णुपुर जिले के Tronglaobi Awang Leikai इलाके में एक घर पर संदिग्ध बम हमला हुआ। इस धमाके में एक 5 साल का बच्चा और उसकी 6 महीने की छोटी बहन की मौत हो गई, जबकि उनकी मां घायल हो गईं। इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इसी बीच CRPF की फायरिंग में तीन और लोगों की जान चली गई, जिससे पूरे राज्य में डर और तनाव का माहौल बन गया है।

सरकार ने हालात संभालने के लिए क्या कदम उठाए?

हिंसा को रोकने और अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इम्फाल वेस्ट, इम्फाल ईस्ट, Thoubal, Kakching और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया है। मुख्यमंत्री Yumnam Khemchand Singh ने बताया कि हमले के पीछे उन लोगों का हाथ है जो शांति भंग करना चाहते हैं। बता दें कि 4 फरवरी 2026 को मणिपुर से राष्ट्रपति शासन हटाया गया था और नई सरकार ने कार्यभार संभाला था। मार्च में शांति बैठक भी हुई थी, लेकिन ताज़ा हमलों ने उन कोशिशों पर पानी फेर दिया है।

इस जातीय संघर्ष में कौन शामिल है और कितना नुकसान हुआ?

  • Meitei समुदाय: यह बहुसंख्यक हिंदू समुदाय है जो मुख्य रूप से इम्फाल घाटी में रहता है।
  • Kuki-Zo समुदाय: यह ईसाई समुदाय है जो पहाड़ी इलाकों में बसता है।
  • नुकसान: सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2023 से अब तक 258 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 60,000 लोग विस्थापित हो गए हैं।
  • सुरक्षा मांग: डिप्टी सीएम Nemcha Kipgen ने सुरक्षा के लिए बफर जोन बनाए रखने और आपसी सुलह की अपील की है।
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.