अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने खाड़ी देशों के दौरे के दौरान एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान के साथ होने वाला कोई भी समझौता Gulf देशों की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में नहीं डालेगा। Rubio ने UAE, Kuwait और Bahrain की यात्रा कर वहां के नेताओं को भरोसा दिलाया कि अमेरिका उनके साथ मजबूती से खड़ा है।

Marco Rubio ने 24-25 जून 2026 के बीच तीन दिनों का कूटनीतिक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अपने Gulf पार्टनर्स के साथ पूरी तरह तालमेल रखेगा और ईरान के साथ बातचीत से जुड़े हर फैसले में इन देशों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा जिससे क्षेत्र के पुराने और भरोसेमंद सहयोगियों की सुरक्षा पर कोई असर पड़े।

दौरे के दौरान Rubio ने Strait of Hormuz के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने Trump प्रशासन की उस नीति को दोहराया जिसमें कहा गया था कि ईरान अगर अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से जहाजों के गुजरने के लिए किसी भी तरह की टोल या फीस मांगता है, तो वह इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि अमेरिका-ईरान समझौते के तहत प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड के लिए Gulf देशों से कोई आर्थिक मदद नहीं मांगी जाएगी।

यह पूरा दौरा अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक शुरुआती ढांचे के समझौते (Framework Agreement) के बाद हुआ है। यह समझौता 28 फरवरी से चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए किया गया था, जिसमें अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे। 1979 के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के बीच ऐसा कोई करार हुआ है। इस समझौते के तहत अब 60 दिनों तक बातचीत चलेगी ताकि एक स्थायी डील फाइनल की जा सके।

हालांकि, Gulf देशों में इस बात को लेकर चिंता थी कि यह शुरुआती समझौता ईरान के प्रति बहुत नरम हो सकता है। उनका मानना था कि इसमें ईरान के मिसाइल प्रोग्राम और उसके क्षेत्रीय गुटों पर कोई सख्त बात नहीं की गई है। इसी बीच, Bahrain के विदेश मंत्री Abdullatif bin Rashid Al Zayani ने ओमान द्वारा जहाजों के सुरक्षित रास्ते की घोषणा का स्वागत किया है।

दूसरी तरफ, ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने इस समझौते को अमेरिका की हार बताया है। उन्होंने दावा किया कि यह ईरान के प्रतिरोध का नतीजा है और साफ कहा कि ईरान Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। साथ ही, ईरान ने NATO की आलोचना करते हुए उसे इस युद्ध में अमेरिका का साथ देने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।