अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और उसके सहयोगी हूती समूह को बहुत कड़ी चेतावनी दी है। रुबियो ने साफ लफ्जों में कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को “टोल वसूली” का जरिया बनाना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका अब बहरीन की अगुवाई में चल रही उस नई अंतरराष्ट्रीय पहल का पूरा समर्थन कर रहा है जिसका मकसद समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए एक बड़ा गठबंधन तैयार करना है। यह कदम वैश्विक व्यापार को ईरान के खतरों से बचाने के लिए उठाया जा रहा है।
हॉर्मुज़ विवाद और अमेरिका की बड़ी बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पूरे मामले पर अपनी सरकार का पक्ष साफ रखा है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती हैं।
- अस्वीकार्य व्यवहार: रुबियो ने कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को ईरान या हूतियों द्वारा टोल रोड में बदलना अमेरिका और दुनिया के लिए मंजूर नहीं है।
- ऑपरेशन एपिक फ्युरी: अमेरिका ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्युरी चला रहा है और प्रशासन का कहना है कि इसके बाद भी रास्ते खुले रखे जाएंगे।
- नाटो देशों की आलोचना: अमेरिका ने उन सहयोगियों की भी आलोचना की है जो ईरान के खिलाफ लड़ाई में साथ नहीं दे रहे हैं, विशेषकर स्पेन द्वारा विमानों को रास्ता न देना।
- मिसाइल का खतरा: तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि उन्होंने पूर्वी भूमध्य सागर में अपनी सीमा में घुस रही एक ईरानी मिसाइल को मार गिराया है।
ईरान और बहरीन के बीच क्या है ताजा स्थिति?
क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अलग-अलग देश अपनी रणनीतियां बना रहे हैं। बहरीन इस समय संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ा राजनयिक मोर्चा संभाल रहा है ताकि समुद्री रास्तों को सुरक्षित किया जा सके।
| देश/संस्था | मौजूदा स्थिति और निर्णय |
|---|---|
| बहरीन | संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में समुद्री सुरक्षा के लिए 22 देशों का गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा। |
| ईरान | अमेरिका और इज़राइल से जुड़े जहाजों के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखने की धमकी दी है। |
| पाकिस्तान | ईरान और अमेरिकी प्रशासन के बीच मध्यस्थ के तौर पर बातचीत की कोशिश कर रहा है। |
| इज़राइल | ऊर्जा पाइपलाइनों को सऊदी अरब के रास्ते लाल सागर तक मोड़ने के विकल्प पर विचार कर रहा है। |
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ने सऊदी अरब से यह भी मांग की है कि वह अपने देश से अमेरिकी सेना को बाहर निकाले। वहीं बहरीन द्वारा पेश किए गए मसौदा प्रस्ताव में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी बहाल करने के लिए जरूरत पड़ने पर सेना के इस्तेमाल की बात भी कही गई है। रूस और चीन द्वारा इस प्रस्ताव पर वीटो करने की संभावना भी बनी हुई है क्योंकि वे ईरान के करीबी माने जाते हैं।
