अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ़ कर दिया है कि ईरान के साथ होने वाली कोई भी डील तब तक कामयाब नहीं होगी, जब तक ईरान अपने फंड का इस्तेमाल मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी ग्रुप्स की मदद के लिए करता रहेगा. उन्होंने यह चेतावनी 25 जून 2026 को अल जज़ीरा इंग्लिश के लाइव अपडेट्स के दौरान दी. Rubio का कहना है कि अमेरिका ऐसी किसी भी डील को मंज़ूर नहीं करेगा जो केवल कागजों पर हो, बल्कि वह एक ऐसी डील चाहते हैं जो असली हो और जिसे पूरी तरह से लागू किया जा सके.
Marco Rubio इस समय खाड़ी देशों के दौरे पर हैं ताकि वहां के सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा दिला सकें. 25 जून 2026 को उन्होंने बहरीन के मनामा में GCC देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक की. इस बैठक में उन्होंने साफ़ किया कि किसी भी समझौते में अमेरिका के क्षेत्रीय साझेदारों के हितों का ख्याल रखा जाना चाहिए और उनकी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा.
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती समझौता (MOU) हुआ है. इसके तहत 60 दिनों की बातचीत की अवधि तय की गई है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में छूट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी है. हालांकि, इस बातचीत में पहले से ही दरारें दिख रही हैं. ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 23 जून 2026 को एलान किया था कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम इस समझौते का हिस्सा नहीं है और इस पर कोई बातचीत नहीं होगी.
Rubio ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जब तक हमास और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी ग्रुप मिसाइल और ड्रोन हमले करेंगे, तब तक मध्य पूर्व में स्थाई शांति संभव नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि समझौते में लिखी “दुश्मनी खत्म करने” की बात का मतलब यही है कि ईरान को अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स और मिसाइल गतिविधियों को पूरी तरह रोकना होगा.
आर्थिक मदद को लेकर Rubio ने बताया कि पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर का फंड तब तक नहीं मिलेगा, जब तक ईरान की लीडरशिप आतंकवाद फैलाने के बजाय एक जिम्मेदार देश की तरह काम नहीं करती. साथ ही, अमेरिका ने यह साफ़ कर दिया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर किसी भी तरह का टोल या फीस स्वीकार नहीं की जाएगी, क्योंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. ओमान ने भी इस बात का समर्थन किया है कि यहाँ कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी.
