सऊदी अरब के तेल ठिकानों को हाल ही में ड्रोन और मिसाइल हमलों का निशाना बनाया गया है। इन हमलों के बाद कई देशों ने सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की है। मॉरिटानिया ने आधिकारिक तौर पर इस हमले की कड़ी निंदा की है और सऊदी अरब की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए अपना पूरा समर्थन व्यक्त किया है।
हमले के बाद सऊदी का कड़ा रुख
27 और 28 जुलाई 2026 को ईरान समर्थित मिलिशिया ने सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र और रियाद में तेल सुविधाओं पर ड्रोन से हमला किया। यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस हमले की जिम्मेदारी ली है। सैटेलाइट तस्वीरों से यनबू और अबकैक में स्थित सऊदी अरामको की सुविधाओं को काफी नुकसान पहुंचने के संकेत मिले हैं। इसके जवाब में, सऊदी अरब की सेना ने 29 जुलाई 2026 को अमेरिका की मदद से इराक में मौजूद उन ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, जो इन मिलिशिया से जुड़े थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा
सऊदी अरब पर हुए इन हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी विरोध हुआ है। मिस्र, बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जीसीसी (GCC), अरब संसद और मुस्लिम वर्ल्ड लीग जैसे संगठनों ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इन देशों का कहना है कि यह हमला क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। मॉरिटानिया के विदेश मंत्रालय ने पहले भी हूती मिलिशिया के बयानों को बेबुनियाद बताया था और कहा था कि सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा और समुद्री रास्तों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
