Saudi Arabia और Türkiye-Pakistan का नया रक्षा समझौता, क्या अमेरिका की सुरक्षा का विकल्प बनेगा मक्का पैक्ट.

Sushma Kumari17 August 20262 min read52 viewsSaudi
Saudi Arabia और Türkiye-Pakistan का नया रक्षा समझौता, क्या अमेरिका की सुरक्षा का विकल्प बनेगा मक्का पैक्ट.

सऊदी अरब, टर्की और पाकिस्तान ने मिलकर एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं जो पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है। इस समझौते का नाम Mecca Joint Defence Agreement है जिस पर 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए गए थे। इस नए समझौते के आने के बाद से ही क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं और दुनिया भर के विश्लेषक यह सोच रहे हैं कि क्या यह अमेरिकी सुरक्षा का विकल्प बन सकता है या नहीं। आम लोगों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस समझौते का असल मतलब क्या है और इससे क्षेत्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।

नाटो की तर्ज पर बनाई गई है यह रक्षा व्यवस्था

इस नए रक्षा समझौते को नाटो के आर्टिकल 5 की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसका मतलब यह है कि अगर गठबंधन के किसी भी एक सदस्य देश पर हमला होता है तो उसे सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। हालांकि टर्की के अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि इस समझौते के तहत किसी भी देश को सैन्य सहायता तभी मिलेगी जब उसकी तरफ से औपचारिक अनुरोध किया जाएगा। यह मदद खुफिया जानकारी या फिर लॉजिस्टिक सहायता के रूप में हो सकती है। सऊदी अरब के नेतृत्व ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि इस समझौते के जरिए किसी भी औपचारिक सैन्य धुरी का निर्माण नहीं किया जा रहा है और इसमें किसी भी तरह की परमाणु क्षमता शामिल नहीं है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से इस समझौते की सराहना की है और इसे बोझ बांटने की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम बताया है। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने भी इस पर अपनी खुशी जाहिर की है। हालांकि दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी के रक्षा विश्लेषक Mansoor Ahmed ने इसे मुस्लिम नाटो कहने से मना किया है। उनका यह मानना है कि इसे एक मुस्लिम नाटो कहने के बजाय सहयोग के लिए एक लचीले ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए।

क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान का एंगल

विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिका के पुराने सुरक्षा छत्र को पूरी तरह से हटाना नहीं है। बल्कि यह समझौता मुख्य रूप से क्षेत्रीय अस्थिरता से निपटने के लिए एक सुरक्षा उपाय के रूप में काम करता है। खासकर ईरान से जुड़ी क्षेत्रीय गतिविधियों और तनाव को ध्यान में रखते हुए इस तरह के कदम उठाए गए हैं। मध्य पूर्व में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की स्थिति पर नजर रखने वाले लोगों के लिए यह समझौता काफी अहम है क्योंकि इससे आने वाले समय में खाड़ी देशों की सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Share:

Comments

Leave a comment