अमेरिका में चुनाव का खेल, सीनेट उम्मीदवार माइक रोजर्स ने AIPAC से मांगी मदद रोकने की अजीब अपील.

अमेरिका की राजनीति में इन दिनों एक अजीब वाकया सामने आया है जहां मिशिगन राज्य से रिपब्लिकन पार्टी के सीनेट उम्मीदवार Mike Rogers के साथियों ने अमेरिकन इजराइल पब्लिक अफेयर्स कमेटी यानी AIPAC से अपने समर्थन में विज्ञापन न चलाने की अपील की है। Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार यह पूरी बातचीत पिछले हफ्ते लॉस एंजिल्स में माइक रोजर्स और AIPAC के अध्यक्ष Michael Tuchin के बीच हुई एक बैठक के बाद सामने आई है। इस बैठक के बाद लॉबीइंग संगठन ने अपने उस वीडियो विज्ञापन को भी रोक दिया जिसे उन्होंने रोजर्स के डेमोक्रेटिक विरोधी Abdul El-Sayed के खिलाफ चलाने के लिए पहले से तैयार किया था।
चुनावी राजनीति और समर्थन पर उठते सवाल
डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सायद इजराइल के कड़े आलोचक माने जाते हैं और उन्होंने हाल ही में 4 अगस्त को हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में हेले स्टीवंस को हराया था। इस प्राइमरी चुनाव के दौरान अब्दुल एल-सायद को हराने के लिए AIPAC ने 30 मिलियन डॉलर से ज्यादा का भारी-भरकम निवेश किया था और वे नवंबर महीने में होने वाले आम चुनाव के लिए माइक रोजर्स को मजबूत करने के वास्ते करोड़ों रुपये और खर्च करने की तैयारी में थे। लेकिन रोजर्स के अभियान दल की तरफ से जब यह कहा गया कि उन्हें इतने बड़े स्तर पर समर्थन की जरूरत नहीं है और वे अपना दखल कम करें तो AIPAC के अधिकारी इस बात से काफी नाराज हो गए।
वोटरों की नाराजगी और बदलती नीतियां
माइक रोजर्स के चुनावी कैंपेन से जुड़े लोगों का मानना है कि AIPAC के साथ सार्वजनिक रूप से जुड़ना अब उनके राजनीतिक करियर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सायद ने चुनाव प्रचार के दौरान AIPAC द्वारा किए गए भारी खर्च को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया था और जनता के बीच इस मुद्दे को उठाया था। फॉक्स न्यूज के आंकड़ों के मुताबिक इस समय मिशिगन के लगभग 55% वोटर इजराइल को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता के खिलाफ हैं। गाजा में चल रहे युद्ध की वजह से आम जनता में नाराजगी है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दल अब ऐसे संगठनों से थोड़ी दूरी बना रहे हैं ताकि आम मतदाताओं का गुस्सा न झेलना पड़े।
बातचीत रुकी और बीच-बचाव की कोशिश
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद माइक रोजर्स के सहयोगियों और AIPAC के बीच सीधी बातचीत फिलहाल पूरी तरह से रुक गई है। दोनों पक्षों के बीच पैदा हुई इस दूरी और तनाव को खत्म करने के लिए कुछ रिपब्लिकन दानदाता आगे आए हैं जो दोनों तरफ से संबंध रखते हैं और अब वे इस मामले में मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि चुनाव से पहले स्थिति को संभाला जा सके।