मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध की वजह से पूरी दुनिया के बाज़ारों में डर का माहौल है। रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने चेतावनी दी है कि इस झगड़े से ग्लोबल मार्केट और क्रेडिट आउटलुक पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे खाने-पीने की चीज़ों और ईंधन की कीमतों में भारी उछाल आने की संभावना है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

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आम लोगों और देशों पर क्या होगा असर?

S&P के मुताबिक, अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो ऊर्जा आयात करने वाले देशों की GDP में 2-3% की गिरावट आ सकती है। साथ ही, महंगाई की दर 5% से ज़्यादा बढ़ सकती है। इसका सीधा असर भारत और चीन जैसे उभरते बाज़ारों पर पड़ेगा, जहाँ पेट्रोल-डीज़ल और गैस की कीमतें बढ़ने से रोज़मर्रा का सामान महंगा हो जाएगा।

किन सेक्टरों और देशों में मची है खलबली?

युद्ध की वजह से कई बड़े सेक्टर और देश मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं। तेल, गैस और विमानन जैसे सेक्टर पहले ही दबाव में हैं और अब यह असर खेती और सामान ढोने वाले लॉजिस्टिक्स तक फैल रहा है। नीचे दी गई टेबल में प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी दी गई है:

प्रभावित क्षेत्र/देश असर का प्रकार
कुवैत, UAE, मिस्र गैर-तेल सेक्टर में कामकाज की धीमी रफ्तार
भारत, चीन, वियतनाम ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई का डर
तेल और गैस सेक्टर क्रेडिट रेटिंग में गिरावट और आर्थिक दबाव
केमिकल्स और फर्टिलाइजर सप्लाई चेन में रुकावट और मुनाफे में कमी
विमानन और लॉजिस्टिक्स बीमा खर्च में बढ़ोतरी और शिपिंग में देरी
इराक और बहरीन क्रेडिट आउटलुक नेगेटिव हुआ

खाड़ी देशों की वर्तमान स्थिति क्या है?

कुवैत, यूएई और मिस्र जैसे देशों के गैर-तेल सेक्टर में व्यापार धीमा हुआ है। कुवैत में मार्च महीने के दौरान बिजनेस एक्टिविटी काफी गिरी है, जिससे वहां के बाजार में संकुचन देखा गया। इसके अलावा, Moody’s ने इराक और बहरीन के क्रेडिट आउटलुक को नेगेटिव कर दिया है, जबकि तुर्की की रेटिंग फिलहाल स्थिर बनी हुई है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.