Middle East Crisis: हवाई टिकट होंगे महंगे, हज़ारों फ्लाइट्स रद्द, DGCA ने पायलटों को दी बड़ी राहत

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने आम यात्रियों और एयरलाइंस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हज़ारों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और अब हवाई टिकटों के दाम बढ़ने की आशंका है। इस संकट के बीच भारत के DGCA ने पायलटों के लिए कुछ खास नियम बदले हैं ताकि रूट बदलने के कारण लंबी हुई यात्राएं रद्द न हों।

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मिडिल ईस्ट संकट का यात्रियों और एयरलाइंस पर क्या असर पड़ा है?

तनाव की वजह से हवाई क्षेत्र बंद हुए और कई उड़ानों के रूट बदलने पड़े, जिससे खर्च और समय दोनों बढ़ गए। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने बताया कि अब तक 2,500 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और एयरलाइन इस रूट पर अपनी क्षमता के केवल 30% हिस्से पर काम कर पा रही है। ईंधन की कीमतें बढ़ने के कारण 1 अप्रैल से टिकट महंगे होने की संभावना है।

DGCA और सरकार ने इस स्थिति में क्या कदम उठाए हैं?

  • ड्यूटी समय में छूट: DGCA ने 30 अप्रैल 2026 तक पायलटों के ड्यूटी और उड़ान समय में 1.5 घंटे की छूट दी है ताकि लंबी उड़ानें रद्द न हों।
  • सुरक्षा चेतावनी: मार्च में DGCA ने 11 देशों को उच्च जोखिम वाला क्षेत्र घोषित कर भारतीय विमानों को वहां सावधानी बरतने की सलाह दी थी।
  • मंत्रालय की निगरानी: नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) स्थिति पर नज़र रख रहा है और यात्रियों की परेशानी कम करने के लिए एयरलाइंस के साथ तालमेल बना रहा है।

संकट से जुड़ी मुख्य जानकारियां और तारीखें

तारीख / समय मुख्य घटना असर
28 फरवरी – 10 मार्च व्यापक हवाई क्षेत्र बंद 43,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द
21 मार्च 2026 ईंधन की कीमतें बढ़ीं 1 अप्रैल से हवाई टिकट महंगे होने के संकेत
22 मार्च 2026 एयर इंडिया की रिपोर्ट 2,500 उड़ानें रद्द, क्षमता घटकर 30% हुई
8 अप्रैल 2026 DGCA का फैसला पायलटों के ड्यूटी समय में 1.5 घंटे की छूट
10 अप्रैल 2026 Whalesbook रिपोर्ट पायलटों में नौकरी खोने और सुरक्षा का डर
अप्रैल 2026 संघर्ष विराम के बाद इराक, बहरीन और सीरिया में सीमित उड़ानें शुरू
कुल प्रभाव ग्लोबल क्षमता में गिरावट वैश्विक एयरलाइन क्षमता में 10% की कमी