मिडल ईस्ट के संकट ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। UN रिफ्यूजी एजेंसी (UNHCR) ने चेतावनी दी है कि इस लड़ाई का असर अब दुनिया भर में मदद पहुँचाने वाले रास्तों पर पड़ रहा है। इससे न केवल ज़रूरी सामान पहुँचने में देरी हो रही है, बल्कि उसका खर्च भी बहुत बढ़ गया है।

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मदद पहुँचाने के रास्तों और खर्च में कितनी बढ़ोतरी हुई?

UNHCR की प्रवक्ता कार्लोटा वुल्फ ने बताया कि ट्रांसपोर्ट और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से मुसीबत बढ़ गई है। सामान पहुँचाने के खर्च और समय में भारी बदलाव आया है, जिससे ज़रूरी सहायता समय पर नहीं पहुँच पा रही है।

विवरण पुराना खर्च/समय नया खर्च/समय
दुबई से सूडान और चाड का खर्च $927,000 $1.87 मिलियन
डिलीवरी का समय सामान्य समय 25 दिन तक की देरी

समुद्री रास्तों पर बढ़े जोखिम की वजह से जहाजों के इंश्योरेंस का पैसा भी बहुत बढ़ गया है। कई जगहों पर तो इंश्योरेंस मिलना भी बंद हो गया है, जिससे मानवीय सहायता का सामान भेजना और भी कठिन हो गया है।

दुनिया भर में भूख और महंगाई का खतरा क्यों बढ़ गया है?

संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई है। इसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • UN Secretary-General: एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में रुकावट आने से पूरी दुनिया में भूख, गरीबी और महंगाई बढ़ सकती है।
  • IMO की चेतावनी: इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने जहाजों पर हमलों की निंदा की है और समुद्र में बड़े स्तर पर प्रदूषण फैलने का डर जताया है।
  • अन्य एजेंसियां: WFP, UNICEF और IOM ने बताया कि सूडान, सोमालिया और दक्षिण सूडान जैसे इलाकों में मदद पहुँचाना अब बहुत मुश्किल हो गया है।
  • यूरोपीय आयोग: मिडिल ईस्ट के प्रभावित देशों की मदद के लिए 2026 के लिए 458 मिलियन यूरो की राशि देने का वादा किया गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

मिडल ईस्ट संकट से दुनिया भर के आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

इससे दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों और खाद की कमी हो सकती है, जिससे महंगाई बढ़ेगी और गरीब देशों में भूखमरी का खतरा बढ़ सकता है।

राहत सामग्री पहुँचने में देरी क्यों हो रही है?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मुख्य रास्तों पर अस्थिरता के कारण सामान को लंबे और महंगे रास्तों से भेजना पड़ रहा है, जिससे डिलीवरी में 25 दिन तक की देरी हो रही है।