मिडल ईस्ट की खाड़ी में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। दुनिया की 10 सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियों के कम से कम 43 कंटेनर जहाज़ यहाँ फंसे हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी विवाद की वजह से समुद्री रास्ता अब सुरक्षित नहीं रहा, जिससे पूरी दुनिया के व्यापार और सामान की सप्लाई पर बुरा असर पड़ सकता है।
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मिडल ईस्ट गल्फ में कितने जहाज़ फंसे हैं और मौजूदा स्थिति क्या है?
लॉयड लिस्ट और अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया की टॉप 10 शिपिंग कंपनियों के 43 से ज़्यादा कंटेनर जहाज़ खाड़ी में फंसे हुए हैं। पहले इस समुद्री रास्ते से रोज़ाना लगभग 140 जहाज़ गुज़रते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर सिर्फ 5 जहाज़ रह गई है। जहाजों की इस भारी कमी की वजह से सामान पहुँचने में देरी होगी और खर्च भी बढ़ सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच विवाद और जहाज़ों की जब्ती का मामला क्या है?
यह पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 को ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी थी। इसके जवाब में ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में पाबंदियाँ लगा दीं और समुद्री माइन्स बिछा दिए। ईरान ने MSC Francesca और Epaminondas नाम के दो जहाज़ों को भी ज़ब्त कर लिया है, क्योंकि उनका दावा है कि इन जहाज़ों ने ईरानी समुद्री नियमों का उल्लंघन किया था।
भविष्य में क्या होगा और जान-माल का कितना खतरा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की अवधि तो बढ़ा दी है, लेकिन नौसेना की घेराबंदी अब भी जारी है। सुरक्षा विशेषज्ञ जैकब लार्सन और पीटर सैंड का कहना है कि जब तक दोनों देश लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक नाविकों और कार्गो के लिए यह रास्ता सुरक्षित नहीं है। वहीं अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो आर्थिक दबाव के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह गिर सकती है।