मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और जंग का सीधा असर अब हवाई सफर पर दिखने लगा है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने अप्रैल 2026 के आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें वैश्विक यात्री मांग में 3.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। खासकर मिडिल ईस्ट के देशों में विमानों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। ईंधन की कीमतें दोगुनी होने से फ्लाइट टिकटों के दाम काफी बढ़ गए हैं, जिससे आम यात्रियों और प्रवासियों की जेब पर सीधा बोझ पड़ रहा है।
मिडिल ईस्ट में फ्लाइट्स की मांग में भारी गिरावट
IATA के डेटा के अनुसार, अप्रैल 2026 में मिडिल ईस्ट के एयरलाइंस की मांग में 48.1 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई है। क्षेत्र में चल रहे तनाव के कारण उड़ानों की क्षमता (कैपेसिटी) में भी 38.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। IATA के महानिदेशक विली वॉल्श (Willie Walsh) ने बताया कि मिडिल ईस्ट की विमान सेवा में आई इस भारी गिरावट के कारण पूरी दुनिया की यात्री मांग में 3.4 प्रतिशत की कमी आई है। अगर मिडिल ईस्ट को छोड़ दिया जाए, तो दुनिया के बाकी हिस्सों में हवाई यात्रा की मांग में 1.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
ईंधन के दाम हुए दोगुने, बढ़ गया हवाई किराया
जंग के कारण सिर्फ उड़ानें ही प्रभावित नहीं हुई हैं, बल्कि जेट फ्यूल (हवाई ईंधन) की कीमतें भी अप्रैल महीने में दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ईंधन महंगा होने की वजह से विमान कंपनियों ने टिकटों के दाम बढ़ा दिए हैं। इसके साथ ही, खाड़ी देशों के बड़े हवाई अड्डों पर उड़ानों में बाधा आने से यूरोप और एशिया के बीच का रूट बदल गया है। अब यूरोप और एशिया के बीच सीधी उड़ानों में 15.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है क्योंकि लोग मिडिल ईस्ट से होकर जाने वाले रूट से बच रहे हैं।
अप्रैल 2026 के मुख्य आंकड़े
| श्रेणी (Category) | बदलाव (अप्रैल 2026 बनाम अप्रैल 2025) |
|---|---|
| वैश्विक यात्री मांग (Global Demand) | -3.4% |
| वैश्विक क्षमता (Global Capacity) | -2.9% |
| अंतरराष्ट्रीय मांग (International Demand) | -5.3% |
| घरेलू मांग (Domestic Demand) | कोई बदलाव नहीं (Flat) |
| मिडिल ईस्ट विमान मांग (ME Demand) | -48.1% |
| यूरोप-एशिया सीधा ट्रैफिक (Direct Traffic) | +15.3% |
| वैश्विक एयर कार्गो मांग (Global Cargo) | +4.0% |
| मिडिल ईस्ट कार्गो मांग (ME Cargo) | -18.2% |
कार्गो सर्विस और प्रवासियों पर इसका असर
जंग के इस माहौल में जहां हवाई यात्रियों की संख्या घटी है, वहीं एयर कार्गो (सामान डिलीवरी) में वैश्विक स्तर पर 4 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है। हालांकि, मिडिल ईस्ट के देशों के लिए कार्गो मांग में 18.2 प्रतिशत की गिरावट आई है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह समय मुश्किल भरा है क्योंकि भारत और खाड़ी देशों के बीच यात्रा करने वालों को अब महंगे टिकट खरीदने पड़ रहे हैं और कई उड़ानों के रूट बदलने से यात्रा का समय भी बढ़ गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जंग के कारण मिडिल ईस्ट की उड़ानों पर कितना असर पड़ा है?
मिडिल ईस्ट की एयरलाइंस की यात्री मांग में अप्रैल 2026 में 48.1 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है, और उड़ानों की कुल क्षमता भी 38.4 प्रतिशत तक कम हो गई है।
क्या इस तनाव के कारण हवाई टिकटों के दाम बढ़े हैं?
हां, अप्रैल में जेट ईंधन (Jet Fuel) की कीमतें दोगुनी से अधिक होने के कारण एयरलाइंस ने किराए बढ़ा दिए हैं, जिससे यात्रियों को अधिक खर्च करना पड़ रहा है।