MJ Akbar का अमेरिका से सवाल, क्या मक्का समझौता 'इस्लामिक नाटो' बनने जा रहा है?

Nura Basta20 August 20262 min read53 viewsSaudi
MJ Akbar का अमेरिका से सवाल, क्या मक्का समझौता 'इस्लामिक नाटो' बनने जा रहा है?

पूर्व केंद्रीय मंत्री MJ Akbar ने हाल ही में अमेरिका से मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर खुलकर सफाई मांगी है। उन्होंने यह सवाल उठाया है कि क्या यह त्रिपक्षीय समझौता धीरे-धीरे किसी 'Islamic NATO' यानी इस्लामिक नाटो का रूप लेता जा रहा है। Thursday, August 20, 2026 को एक बयान देते हुए उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर की और अमेरिका से कहा कि वह इस नए गठबंधन के लंबे समय के उद्देश्यों और सामूहिक रक्षा ढांचे के बारे में पूरी स्पष्टता दे, ताकि स्थिति साफ हो सके।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौता क्या है

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Mecca Joint Defense Agreement असल में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुआ एक सैन्य समझौता है। इस समझौते को औपचारिक रूप से August 7, 2026 को लागू किया गया था। यह पूरा सुरक्षा समझौता नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी NATO के आर्टिकल 5 की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसके तहत यह नियम बनाया गया है कि यदि किसी एक सदस्य देश पर भी हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, इस समझौते में यह भी साफ किया गया है कि किसी भी देश पर हमला होने पर तुरंत कोई स्वचालित सैन्य कार्रवाई करना अनिवार्य नहीं होगा। इसके बजाय, सभी देश मिलकर आपस में बातचीत करेंगे और फिर हर देश अपनी खुद की संवैधानिक प्रक्रियाओं के हिसाब से अपने कदम तय करेगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य अभ्यास, तकनीक के लेन-देन और रक्षा उद्योगों को आपस में जोड़ना है, जो कि September 17, 2025 को सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए पुराने समझौते की नींव पर आधारित है।

अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रिया

इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने August 17, 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social के जरिए अपनी बात रखी थी। उन्होंने इस समझौते का समर्थन करते हुए इसे क्षेत्रीय आत्म-रक्षा की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम बताया था। वहीं दूसरी तरफ, तुर्की के अधिकारियों ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि यह नया समझौता उनके पुराने नाटो समझौतों की जगह नहीं लेगा और न ही यह किसी खास देश के खिलाफ बनाया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि मध्य पूर्व की बदलती राजनीति के बीच यह एक बड़ा बदलाव जरूर है, लेकिन इससे पाकिस्तान की परमाणु ताकत का दायरा सऊदी अरब या तुर्की तक नहीं पहुंचेगा। यह नया गठबंधन ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में काफी तनाव चल रहा है, जिसमें 2026 Iran war भी शामिल है। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि इन तीनों देशों ने बाहरी ताकतों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए यह अपना खुद का सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।

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