एमएससी (MSC) कंपनी ने यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच सामान पहुँचाने के लिए एक नया रास्ता शुरू किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होरमुज से होकर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे इलाके में चल रहे तनाव के समय में होने वाली दिक्कतों से बचा जा सकेगा। यह नया सिस्टम समुद्री और सड़क परिवहन का एक मिला-जुला रूप है, जिससे सामान की डिलीवरी सुरक्षित होगी।
यह नया रास्ता क्या है और कैसे काम करेगा?
इस सेवा के तहत बड़े मालवाहक जहाज यूरोप के विभिन्न बंदरगाहों से निकलकर स्वेज नहर के रास्ते सऊदी अरब के पश्चिमी तट पर स्थित जेद्दा इस्लामिक पोर्ट और किंग अब्दुल्ला पोर्ट पहुंचेंगे। यहाँ माल उतारने के बाद, सामान को ट्रकों में लादा जाएगा और करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय कर रियाद होते हुए पूर्वी तट पर स्थित दम्माम पहुंचाया जाएगा। दम्माम पहुंचने के बाद छोटे जहाजों (फीडर वेसल्स) के जरिए सामान को अन्य खाड़ी देशों में भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की क्षमता लगभग 16,000 कंटेनर की है।
किन देशों और बंदरगाहों को मिलेगा इसका फायदा?
इस नए रूट में यूरोप के कई बड़े पोर्ट्स जैसे ग्दांस्क, ब्रेमरहेवन, एंटवर्प, वेलेंसिया, बार्सिलोना और जियोया ताउरो शामिल किए गए हैं। दम्माम पहुंचने के बाद यहाँ से अबू धाबी, दुबई के जेबेल अली, बहरीन, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों तक सामान की सप्लाई होगी। सऊदी पोर्ट्स अथॉरिटी (मावानी) के अनुसार, यह कदम सऊदी अरब की राष्ट्रीय परिवहन और लॉजिस्टिक्स रणनीति का हिस्सा है, जिसका मकसद किंगडम को एक ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब के रूप में मजबूत करना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह नई शिपिंग सेवा कब से शुरू हो रही है?
इस नई सेवा की पहली यात्रा 10 मई को बेल्जियम के एंटवर्प बंदरगाह से शुरू होने वाली है।
इस नए रूट की जरूरत क्यों पड़ी?
मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और होरमुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों के कारण यह वैकल्पिक रास्ता निकाला गया है।