मेडिसिन सैंस फ्रंटियर्स ने इसराइल के खिलाफ उठाया कदम, मेडिकल स्टाफ पर हुए हमलों की जांच बंद करने पर जताई कड़ी नाराजगी.

अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन डक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स यानी Médecins Sans Frontières (MSF) ने 20 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान जारी किया है। संगठन ने इसराइली मिलिट्री एडवोकेट जनरल के उस फैसले की कड़ी निंदा की है, जिसमें मेडिकल स्टाफ पर हुए दो घातक हमलों की जांच को बिना किसी क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन के बंद कर दिया गया। इसराइली सेना ने 19 अगस्त 2026 को यह जानकारी दी थी कि इन मामलों में आगे कोई भी क्रिमिनल जांच करने के लिए कोई ठोस वजह या शक नहीं बनता है।
गाजा में हुए इन दो अलग-अलग हमलों में MSF के चार कर्मचारियों की जान चली गई थी। पहला हमला नवंबर 2023 में गाजा सिटी में एक काफिले पर हुआ था, जिसमें दो लोग मारे गए थे। इसके बाद दूसरा हमला फरवरी 2024 में खान यूनिस में एक शेल्टर पर हुआ, जिसमें दो और कर्मचारियों की मौत हो गई। संगठन की तरफ से बताया गया कि अक्टूबर 2023 से लेकर अब तक इसराइली सेना के हमलों में उनके कुल 15 कर्मचारी अपनी जान गंवा चुके हैं।
न्याय की मांग और स्वतंत्र जांच की अपील
संगठन ने इन मामलों की फाइल करीब दो साल पहले रिव्यू के लिए जमा की थी। जब इसराइली सेना की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला, तब इस मामले को इसराइली हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस में भी चुनौती दी गई थी। अपने हालिया बयान में संगठन ने इसराइली सेना की आंतरिक जांच रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह फैसला सिर्फ उस फौजी तंत्र का नतीजा है जो खुद ही अपनी ही जांच कर रहा है। संगठन का यह भी कहना है कि इसराइली कानूनी व्यवस्था में इतनी क्षमता नहीं है कि वह युद्ध अपराधों या गाजा के मौजूदा हालात में किसी को जवाबदेह ठहरा सके।
इस फैसले को न्याय नहीं बल्कि लीपापोती बताते हुए मानवीय संगठन ने अब किसी स्वतंत्र निकाय से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पारदर्शिता की इस मांग में उनके साथ World Central Kitchen (WCK) भी शामिल हो गया है। इन संगठनों का साफ कहना है कि सेना की अंदरूनी जांच कभी भी निष्पक्ष और असली जवाबदेही की जगह नहीं ले सकती है, इसलिए स्वतंत्र रूप से मामलों की सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि पीड़ितों को इंसाफ मिल सके।