बदलेगा नोट और पासपोर्ट. सिक्योरिटी पेपर मिल में अब दोगुना बनेंगे नोट और पासपोर्ट के कागज, 1800 करोड़ का प्रस्ताव मंजूर

GulfHindi Desk8 January 20263 min read0 viewsIndia

भारतीय करेंसी नोट, पासपोर्ट और स्टांप पेपर अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और हाई-क्वालिटी के होंगे। सरकार ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कागज की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने हाई-सिक्योरिटी पेपर बनाने के लिए एक नई ‘सिलिंड्रिकल मोल्ड वॉटरमार्क बैंकनोट’ (CWBN) लाइन स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब 1,800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

करेंसी नोट, पासपोर्ट और स्टांप पेपर होंगे और सुरक्षित, सरकार ने 1,800 करोड़ रुपये के बड़े प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी

यह महत्वपूर्ण फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश में पासपोर्ट जारी होने की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है और पुराने नोटों को बदलने की प्रक्रिया के चलते मौजूदा उत्पादन क्षमता पर दबाव पड़ रहा था। सिक्योरिटी पेपर भारत के सॉवरेन प्रिंटिंग इकोसिस्टम का एक बेहद जरूरी हिस्सा है। कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। इस नई पहल से न केवल नोटों और दस्तावेजों की क्वालिटी सुधरेगा, बल्कि उनकी सुरक्षा विशेषताएं (Security Features) भी काफी मजबूत हो जाएंगी।

जानिए क्या है ‘सिलिंड्रिकल मोल्ड वॉटरमार्क’ तकनीक, जिससे कागज के भीतर ही तैयार होता है सुरक्षा चक्र

आम लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर यह नई तकनीक क्या है? आपको बता दें कि सिलिंड्रिकल मोल्ड वॉटरमार्क बैंकनोट (CWBN) एक विशेष प्रकार का हाई-सिक्योरिटी कागज होता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बैंकनोट, पासपोर्ट और नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर बनाने के लिए किया जाता है। यह कागज ‘सिलेंडर मोल्ड प्रोसेस’ नामक एक उन्नत तकनीक के जरिए तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया की खासियत यह है कि इसमें वॉटरमार्क (Watermark) को बाद में नहीं छापा जाता, बल्कि कागज बनते समय ही उसके अंदर बनाया जाता है, जिससे इसकी नकल करना नामुमकिन हो जाता है।

नर्मदापुरम की सिक्योरिटी पेपर मिल में उत्पादन होगा दोगुना, 1970 के दशक की पुरानी मशीनों की जगह लेगी नई टेक्नोलॉजी

सरकार की योजना के अनुसार, यह नई यूनिट मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित सिक्योरिटी पेपर मिल (SPM) में लगाई जाएगी। यह नई लाइन वहां मौजूद तीन पुरानी प्रोडक्शन लाइनों में से दो की जगह लेगी, जो 1970 के दशक से चल रही थीं और अब काफी पुरानी हो चुकी हैं। नई CWBN लाइन की सालाना क्षमता 6,000 टन होगी। इसके लगने के बाद, सिक्योरिटी पेपर मिल की कुल सालाना क्षमता बढ़कर लगभग 12,000 टन हाई-सिक्योरिटी पेपर की हो जाएगी। आसान शब्दों में कहें तो मिल का उत्पादन सीधे दोगुना हो जाएगा।

आने वाले कई दशकों तक भारत सुरक्षा कागज के मामले में बनेगा आत्मनिर्भर, पर्यावरण के भी अनुकूल होगा नया सिस्टम

यह अपग्रेड सीधे तौर पर देश में बढ़ती पासपोर्ट की मांग, स्टांप पेपर और सरकारी सिक्योरिटी डॉक्यूमेंट्स की जरूरतों को पूरा करेगा। साथ ही, सर्कुलेशन में मौजूद खराब हो चुके बैंकनोट्स को बदलने में भी इससे मदद मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि 2024-25 में हर साल जारी किए जाने वाले पासपोर्ट की संख्या 1.4 करोड़ (14 मिलियन) से ज्यादा हो गई है, ऐसे में सिक्योरिटी पेपर की मांग काफी बढ़ गई है। नई मशीनों और प्रोसेस सिस्टम की एक और खासियत यह है कि ये पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होंगे और इसमें पानी की भी बचत होगी। इस कदम से भारत आने वाले कई दशकों तक सिक्योरिटी पेपर के मामले में आत्मनिर्भर बना रहेगा।

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