NATO के सेक्रेटरी जनरल Mark Rutte ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ उठाए गए कदमों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए ये कदम उठाना बहुत जरूरी था। उनके मुताबिक, अगर ईरान के पास परमाणु ताकत आ जाती, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा होता।

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Rutte ने ईरान को आतंकवाद और अफरा-तफरी फैलाने वाला देश बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बातचीत और डिप्लोमेसी में ज्यादा देर की जाती, तो स्थिति उत्तर कोरिया जैसी हो जाती, जहां समय निकल जाने के बाद कुछ करना बहुत मुश्किल होता है।

साल 2026 की शुरुआत में अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ‘Operation Epic Fury’ चलाया था। इस सैन्य अभियान में ईरान के परमाणु केंद्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले से ईरान की क्षेत्रीय सैन्य ताकत को काफी बड़ा झटका लगा।

मार्च 2026 में ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की खबर आने पर Rutte ने कहा कि इससे दुनिया की सुरक्षा बढ़ी है क्योंकि इससे ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता कम हुई। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक कच्चा शांति समझौता हुआ है और दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है।

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने मई 2025 की रिपोर्ट में बताया था कि ईरान यूरेनियम को 60% तक बढ़ा रहा है, जो कि तय सीमा 3.67% से कहीं ज्यादा है। एजेंसी के मुताबिक ईरान के पास इतना मटेरियल जमा हो चुका है कि वह 9 परमाणु बम बना सकता है और उसका ‘ब्रेकआउट टाइम’ अब लगभग खत्म हो गया है।

अब एक नए समझौते (MOU) के तहत ईरान ने परमाणु निरीक्षकों को वापस देश में आने की अनुमति दी है। इस समझौते में ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की बात दोहराई है। Mark Rutte ने यह भी साफ किया कि ‘Operation Epic Fury’ अमेरिका और इसराइल का मिशन था, नाटो का नहीं, लेकिन कई यूरोपीय देशों ने बेस और लॉजिस्टिक्स के जरिए इसमें मदद की थी।