NATO के विदेश मंत्रियों और Gulf Cooperation Council (GCC) के प्रतिनिधियों की एक बड़ी बैठक मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को Ankara में हुई. इस मीटिंग का मुख्य मकसद Strait of Hormuz में चल रहे सुरक्षा संकट को सुलझाना था. यह समुद्री रास्ता दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई के लिए बेहद जरूरी है.
बैठक में फ्रांस और ब्रिटेन ने एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत एक मल्टीनेशनल समुद्री मिशन बनाया जाएगा. इसका मकसद इस जलमार्ग में स्थिरता वापस लाना है. हालांकि, जून के बीच में अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौता हुआ था, लेकिन फिर भी यह रास्ता बंद है. इस वजह से पूरी दुनिया में सप्लाई चेन खराब हुई है और तेल की कीमतों के साथ-साथ शिपिंग का खर्च भी बढ़ गया है.
इस चर्चा में बहरीन, कुवैत, कतर और UAE के विदेश मंत्री शामिल हुए. उनके साथ ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और बेल्जियम जैसे NATO सहयोगी देश भी मौजूद थे. सभी देशों ने नौसेना की तैनाती पर विचार किया. ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने बताया कि बारूदी सुरंगों को हटाने जैसे सैन्य अभियान तभी शुरू होंगे, जब सक्रिय लड़ाई पूरी तरह रुक जाएगी.
NATO की मिलिट्री कमेटी के चेयरमैन एडमिरल Giuseppe Cavo Dragone ने चेतावनी दी कि यूक्रेन युद्ध और Strait of Hormuz का यह संकट मिलकर दुनिया की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है.
समिट के आयोजक अब एक औपचारिक सैन्य गठबंधन के बजाय ‘स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप मॉडल’ पर विचार कर रहे हैं. इस मॉडल के तहत Gulf देशों को खुफिया जानकारी साझा करने और संयुक्त समुद्री अभ्यास की सुविधा मिलेगी. लेकिन, इसमें NATO के Article 5 वाली सामूहिक रक्षा गारंटी शामिल नहीं होगी.
यह शिखर सम्मेलन 8 जुलाई तक चलेगा. इसमें एक स्थायी समुद्री सुरक्षा बल बनाने और साइबर डिफेंस वर्किंग ग्रुप बनाने पर चर्चा होगी, ताकि ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को रोका जा सके और सुरक्षा को मजबूत किया जा सके.
