जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। ईरान युद्ध को लेकर दोनों देशों की सोच में बड़ा अंतर आया है, जिसकी वजह से NATO गठबंधन के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, जर्मनी ने साफ़ किया है कि वह इस गठबंधन को बचाकर रखना चाहता है ताकि दुनिया में शांति बनी रहे।
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NATO गठबंधन और ट्रंप-मर्ज़ के बीच विवाद की असली वजह क्या है?
विवाद तब शुरू हुआ जब जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने राष्ट्रपति Donald Trump की ईरान युद्ध चलाने की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा था कि अमेरिका को ईरान के सामने अपमानित होना पड़ रहा है और उनके पास इस युद्ध से बाहर निकलने का कोई साफ़ प्लान नहीं है। इस बात से नाराज़ होकर ट्रंप ने कहा कि चांसलर मर्ज़ को नहीं पता कि वह क्या बात कर रहे हैं।
- सैनिकों की वापसी: इस तकरार के बाद Pentagon ने घोषणा की कि अगले 6 से 12 महीनों में जर्मनी से लगभग 5,000 अमेरिकी सैनिक वापस बुला लिए जाएंगे।
- यूरोप की चिंता: NATO प्रवक्ता Allison Hart ने कहा कि सैनिकों की इस वापसी के बाद अब यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ज़्यादा निवेश करना होगा।
- जर्मनी का स्टैंड: जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने इस फैसले को पहले से अपेक्षित बताया।
ईरान युद्ध और परमाणु हथियारों पर दोनों देशों की क्या राय है?
तनाव के बावजूद, जर्मनी और अमेरिका एक बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दिए जा सकते। राष्ट्रपति Donald Trump का मानना है कि ईरान की सेना काफी कमज़ोर हो चुकी है और उनके साथ एक अंतिम समझौता होना मुमकिन है। उन्होंने Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही पर भी ज़ोर दिया है।
वहीं, चांसलर Friedrich Merz ने स्पष्ट किया कि भले ही ट्रंप के विचार अलग हों, लेकिन अमेरिका अभी भी NATO में जर्मनी का सबसे महत्वपूर्ण साथी है। उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री Ulf Kristersson के साथ मिलकर इस गठबंधन को जीवित रखने की इच्छा जताई है।
यूरोपीय देशों और ब्रिटेन ने सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं?
ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो गया था, जिससे यूरोपीय बाज़ार बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इस स्थिति को संभालने के लिए यूरोपीय देश अब अपनी तैयारी तेज़ कर रहे हैं।
- ब्रिटेन की कार्रवाई: ब्रिटेन ने Middle East में अपना युद्धपोत HMS Dragon तैनात कर दिया है ताकि समुद्र के रास्ते व्यापार सुरक्षित रहे।
- यूरोपीय एकता: स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश अब NATO के यूरोपीय स्तंभ को मज़बूत करने में मदद कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका जर्मनी से अपने सैनिक क्यों हटा रहा है?
जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz द्वारा ईरान युद्ध में अमेरिकी रणनीति की आलोचना करने और ट्रंप को ‘अपमानित’ बताने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सैनिकों की वापसी का फैसला लिया।
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिका और जर्मनी के बीच कौन सी बात समान है?
दोनों ही देश इस बात पर सहमत हैं कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जा सकते और युद्ध का अंत होना चाहिए।