NATO का बड़ा ऐलान, यूरोप में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान के खतरे से निपटने के लिए तैयारी पूरी

Praggya Singh sabal19 August 20262 min read46 viewsWorld
NATO का बड़ा ऐलान, यूरोप में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ईरान के खतरे से निपटने के लिए तैयारी पूरी

नाटो ने यूरोप में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर बढ़ रहे खतरों के बीच अपनी पूरी तैयारी का ऐलान कर दिया है। 19 अगस्त 2026 को यह जानकारी सामने आई कि खुफिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि ईरानी ताकतें दक्षिण-पूर्वी यूरोप में अमेरिका की संपत्ति को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए गठबंधन ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत कर लिया है और साफ कर दिया है कि किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। नाटो ने यह भी याद दिलाया कि इस साल की शुरुआत में उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने तुर्किए की तरफ आ रही चार ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया था।

बुल्गारिया ने Bezmer Air Base पर बढ़ाई सुरक्षा

इस बढ़ते खतरे को देखते हुए बुल्गारिया ने बेजमेर एयर बेस पर सुरक्षा के इंतजाम बहुत ज्यादा कड़े कर दिए हैं। बुल्गारिया के आंतरिक मंत्री इवान डेमर्डझिएव ने पुष्टि की कि रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि सुरक्षा का स्तर खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट से भी ऊपर रखा जा सके। वहीं देश के रक्षा मंत्री दिमितार स्टोयानोव ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल बुल्गारिया की राष्ट्रीय संप्रभुता पर कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और देश हाई अलर्ट पर है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बुल्गारिया की संसद ने पहले ही मंजूरी दे दी थी कि मध्य पूर्व में अभियानों को समर्थन देने के लिए अमेरिका वायु सेना के आठ KC-135 रीफिलिंग विमान और 250 सैन्यकर्मी 24 जुलाई से 1 अक्टूबर 2026 तक बेजमेर एयर बेस पर तैनात रहेंगे। इसके अलावा खुफिया रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई है कि साइप्रस में मौजूद बुनियादी ढांचे को भी ईरानी ताकतों द्वारा संभावित टारगेट के रूप में परखा जा रहा है, जिससे इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है।

शांति वार्ता में रुकावट और कूटनीतिक प्रयास विफल

इस युद्ध को समाप्त करने के लिए जो कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे थे, वे फिलहाल अटक गए हैं। पिछले जून महीने में ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसका मकसद इस संघर्ष को खत्म करना था। लेकिन इसे लागू करने में आ रही अड़चनों और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौकायन को लेकर बढ़ते तनाव के कारण यह प्रक्रिया रुक गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 19 अगस्त को साफ शब्दों में कहा कि इस समय ईरानी सरकार के साथ किसी भी तरह की कोई बातचीत नहीं चल रही है और ना ही भविष्य में ऐसी कोई बैठक तय है। याद दिला दें कि इससे पहले पिछले मार्च के महीने में साइप्रस में एक ब्रिटिश एयर बेस पर भी ड्रोन हमला हुआ था, जिसके बाद से ही पश्चिमी देश और सुरक्षा एजेंसियां खासी सतर्कता बरत रही हैं।

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