NATO ने चार खाड़ी देशों—UAE, कतर, कुवैत और बहरीन के साथ मिलकर सुरक्षा के बड़े प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। यह घोषणा तुर्की के अंकारा में 7 और 8 जुलाई 2026 को हुई समिट के दौरान की गई। इसका मकसद आतंकवाद और ड्रोन जैसे खतरों से इन देशों को बचाना और सुरक्षा को और मजबूत करना है।
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सुरक्षा के किन क्षेत्रों पर होगा काम
NATO के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव Javier Colomina ने बताया कि ये खास प्रोजेक्ट्स कुछ जरूरी चीजों पर फोकस करेंगे। इनमें मुख्य रूप से ये क्षेत्र शामिल हैं:
- आतंकवाद को रोकना (Counterterrorism)
- समुद्र की सुरक्षा करना (Maritime Security)
- ड्रोन हमलों से बचाव (Counter-drone efforts)
- केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) डिफेंस
Colomina ने मीडिया को जानकारी दी कि ये कदम सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने और दोनों पक्षों के साझा हितों को बचाने के लिए उठाए जा रहे हैं।
पुराना समझौता और मौजूदा खतरा
ये सभी काम 2004 के Istanbul Cooperation Initiative (ICI) के तहत किए जा रहे हैं। यह एक ऐसा फ्रेमवर्क है जिसे NATO और मिडिल ईस्ट के देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए बनाया गया था।
Colomina ने कहा कि आज के समय में समुद्री सुरक्षा और ड्रोन से बचाव करना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में कुवैत और बहरीन में ड्रोन और मिसाइल हमले हुए हैं, जिसकी वजह से अब ज्यादा मजबूत डिफेंस सिस्टम की जरूरत है।
समिट में अन्य चर्चा
अंकारा में हुई इस बैठक में सिर्फ खाड़ी देशों की बात नहीं हुई, बल्कि यूरोपीय देशों की रक्षा प्रणाली को मजबूत करने और यूक्रेन की मदद करने जैसे बड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
