SpiceJet News: NCLT ने स्पाइसजेट दिवालिया याचिकाओं पर दिया बड़ा फैसला, इस तारीख तक के लिए सुनवाई टाली

दिल्ली की नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT ने एयरलाइन कंपनी SpiceJet Ltd के खिलाफ दायर कई दिवालिया याचिकाओं पर सुनवाई को फिलहाल आगे बढ़ा दिया है। इस मामले में कोर्ट की एक स्पेशल बेंच ने सुनवाई की, जिसमें न्यायिक सदस्य Mahendra Khandelwal और तकनीकी सदस्य Anu Jagmohan Singh शामिल थे। बुधवार, 19 अगस्त 2026 को इस मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब ट्रिब्यूनल ने कमर्शियल लेसर कंपनी Aviator ML 29641 Ltd को आखिरी समय में हुए समझौते के बाद अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
समझौते के बाद भी लगा भारी जुर्माना
आपसी समझौते की शर्तों के तहत स्पाइसजेट ने एविनेटर एमएल को शुरुआती भुगतान के तौर पर लगभग ₹4.78 करोड़ यानी करीब $500,000 का भुगतान कर दिया है। याचिका वापस ले लिए जाने के बावजूद NCLT बेंच ने स्पाइसजेट और एविनेटर एमएल दोनों पर ₹15 लाख का जुर्माना ठोक दिया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की इस बात पर कड़ी आलोचना की कि उन्होंने अदालत को समझौते के बारे में ठीक उस दिन जानकारी दी जिस दिन फैसला सुनाया जाना था। ट्रिब्यूनल ने इस तरीके को गलत हथकंडा बताया जिससे अदालती समय की बर्बादी हुई और कानूनी प्रक्रिया का मजाक उड़ाया गया।
अन्य लेसरों की लंबित याचिकाएं और बकाया रकम
इस मामले में कुल मिलाकर छह विमान पट्टे पर देने वाली कंपनियों ने स्पाइसजेट के खिलाफ दिवाला और दिवालियापन संहिता यानी IBC की धारा 9 के तहत आठ याचिकाएं दायर कर रखी हैं। इन कंपनियों में साबरमती एविएशन, जेटएयर 17, फल्गु एविएशन लीजिंग, अल्टेर्ना एयरक्राफ्ट वी बी और आवास आयरलैंड शामिल हैं। ये सभी क्रेडिटर एयरलाइन से ₹500 करोड़ से ज्यादा के बकाया पैसों की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ये तमाम याचिकाएं साल 2024 से कोर्ट में लंबित पड़ी हैं और लेसर पिछले दो सालों से अपने पैसे वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आगे की सुनवाई और एयरलाइन की वित्तीय स्थिति
हाल की सुनवाई के दौरान बाकी बचे लेसरों के वकीलों ने मामलों को आगे बढ़ाने पर कड़ी आपत्ति जताई। अब इन सभी मामलों पर अगली सुनवाई गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को तय की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्पाइसजेट का यह सेटलमेंट वाला तरीका एक सोची-समझी चाल है, ताकि वे एक मामले के जरिए बाकी बड़ी दिवालिया कार्यवाही में देरी करवा सकें। हालांकि NCLT बेंच ने यह साफ कर दिया है कि बचे हुए मामलों को अब दोबारा आगे नहीं खिसकाया जाएगा। स्पाइसजेट कंपनी इस समय बेहद खराब आर्थिक स्थिति से गुजर रही है। एयरलाइन ने पिछले साल दिसंबर को खत्म हुए नौ महीनों के दौरान कुल ₹1,138.15 करोड़ का भारी-भरकम शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जो कि इसके पिछले साल की समान अवधि के ₹266.8 करोड़ के नुकसान से काफी ज्यादा है। एयरलाइन इससे पहले भी इस तरह की दिवालिया चेतावनियों से निपटने के लिए आपसी पैसों के लेन-देन या बकाया रकम को शेयरों में बदलने जैसे रास्ते अपनाती रही है।