सऊदी अरब का NEOM Port अब लाल सागर के बीचों-बीच एक बड़ा लॉजिस्टिक सेंटर बन गया है. यह पोर्ट यूरोप, मिस्र, सऊदी अरब, इराक और खाड़ी देशों को आपस में जोड़ेगा. इससे सामान लाने-ले जाने का रास्ता आसान होगा और व्यापार की रफ़्तार बढ़ेगी.

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NEOM Port में क्या नया हुआ है?

14 अप्रैल 2026 को NEOM Port ने Pan Marine और DFDS जैसे पार्टनर्स के साथ मिलकर एक नया यूरोपीय मल्टीमोडल लैंड ब्रिज शुरू किया है. यह नया रूट यूरोप, मिस्र और खाड़ी देशों को जोड़ता है, जिससे कार्गो अब ट्रक और फेरी के जरिए तेज़ी से पहुंचेगा. साल 2026 में ही नया T1 कंटेनर टर्मिनल भी शुरू होगा, जो दुनिया के सबसे बड़े जहाजों को संभालने की क्षमता रखेगा.

पोर्ट की खासियतें और आने वाले लक्ष्य

NEOM पोर्ट को पूरी तरह से आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा रहा है. यहाँ के मुख्य विवरण नीचे दी गई टेबल में हैं:

विशेषता विवरण
T1 टर्मिनल लॉन्च 2026
पूर्ण ऑटोमेशन का लक्ष्य 2028
कंटेनर क्षमता 1.5 मिलियन TEU
क्वे वॉल की लंबाई 900 मीटर
जहाज की गहराई (Draft) 18.5 मीटर
तकनीक AI और इलेक्ट्रिक उपकरण

व्यापार और रोजगार पर क्या असर होगा?

मिस्र, सऊदी अरब और इराक के बीच एक ट्रायल रन किया गया, जिससे सामान पहुंचने का समय 50% से ज़्यादा कम हो गया. यह रूट काहिरा, सफागा पोर्ट और NEOM से होते हुए इराक के इरबिल तक जाता है. साथ ही, यहाँ सऊदी नागरिकों और महिलाओं को रिमोट क्रेन चलाने जैसी हाई-टेक नौकरियों के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है. PIF गवर्नर यासिर अल-रुमय्यान ने साफ़ किया है कि NEOM के प्रोजेक्ट्स बंद नहीं हुए हैं, बल्कि उन्हें सही प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है.