नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, दबाव के चलते तिब्बती अध्ययन का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन रद्द

नेपाल की राजधानी काठमांडू में होने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन पर सरकार ने अचानक रोक लगा दी है। नेपाल सरकार के कड़े निर्देशों के बाद, इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज (IATS) के 17वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को रद्द कर दिया गया है। यह फैसला तब आया है जब इस आयोजन के शुरू होने में महज कुछ दिन का समय बाकी था।
सम्मेलन रद्द होने के पीछे की वजह
काठमांडू विश्वविद्यालय के तहत काम करने वाले हिमालय सेंटर फॉर एशियन स्टडीज के निदेशक डॉ. सागरराज शर्मा ने इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नेपाल सरकार के आधिकारिक अनुरोध के बाद आयोजकों ने सम्मेलन को स्थगित करने का फैसला लिया। इस आयोजन में काठमांडू विश्वविद्यालय, सेंटर फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज और रांगजुंग येशे इंस्टीट्यूट मुख्य रूप से शामिल थे। खबरों के मुताबिक, इस आयोजन के रद्द होने के पीछे पड़ोसी देश चीन का कूटनीतिक दबाव एक बड़ी वजह रहा है। जानकारों का कहना है कि चीनी सरकार ने नेपाल में इस तरह के आयोजन को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई थी, जिसके बाद स्थिति को सामान्य रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
दलाई लामा और चीनी राजदूत का मसला
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में मौजूद चीनी राजदूत चांग ने नेपाली अधिकारियों के साथ बैठक में इस बात पर चिंता जाहिर की थी कि सम्मेलन में दलाई लामा के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं और वहां तिब्बती मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। इसी दबाव के बीच, निर्वासित तिब्बती सरकार यानी सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने भी अपने प्रतिनिधियों को कार्यक्रम में न भेजने का निर्णय लिया था। विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने साफ किया है कि सम्मेलन के रद्द होने से पड़ोसी देशों के साथ नेपाल के कूटनीतिक संबंधों में पैदा हुई तल्खी अब कम हो गई है।
आयोजन की तैयारी और इतिहास
यह महत्वपूर्ण सम्मेलन 23 अगस्त से 29 अगस्त के बीच आयोजित किया जाना था। इस वैश्विक कार्यक्रम में दुनिया भर के 39 देशों से 720 प्रतिनिधि हिस्सा लेने वाले थे, जिनके आने की तैयारी पूरी हो चुकी थी। गौरतलब है कि IATS का यह पहला आयोजन साल 1977 में स्विट्जरलैंड में हुआ था। तब से यह सम्मेलन अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान और कनाडा जैसे कई देशों में सफलतापूर्वक आयोजित हो चुका है। नेपाल में इसका आयोजन पहली बार प्रस्तावित था, लेकिन कूटनीतिक कारणों से अब इसे रद्द कर दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।