नेपाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने अब गंभीर रूप ले लिया है, जिससे 3 लोगों की मौत हो गई है। यह तनाव 26 जुलाई को सुनसरी के देवानगंज इलाके से शुरू हुआ और अब मधेश प्रांत के धनुषा और सिराहा जिलों तक फैल चुका है। हिंसा के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और पत्थरबाजी में कई नागरिक और सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं।
हिंसा में जान गंवाने वालों की पहचान
हिंसा के कारण जान गंवाने वालों में ओम प्रकाश मेहता, जया प्रकाश मेहता और गणेश यादव शामिल हैं। सरकार ने स्थिति को काबू में करने के लिए इनारुवा, जनकपुर, सिराहा, गोलबाजार और लहान समेत कई इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है।
सरकार का सख्त एक्शन और अपील
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने राष्ट्र के नाम संबोधन में घटना पर दुख जताया और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई का वादा किया है। गृह मंत्रालय ने स्थिति की जांच के लिए सात सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है और स्वास्थ्य मंत्रालय घायलों के लिए मुफ्त इलाज की व्यवस्था कर रहा है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने भी लोगों से शांति और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की है।
प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव
गृह मंत्री सुदन गुरुंग की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा बैठक में सात सूत्रीय योजना बनाई गई है। वहीं, विपक्ष के नेता रवि लामिछाने के नेतृत्व में हुई सर्वदलीय बैठक में भी शांति बहाली और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। बिगड़ते हालात को देखते हुए 27 जुलाई को सुनसरी के सुरक्षा अधिकारियों का तबादला भी किया गया है। संसद में भी इस विषय पर तीखी चर्चा हुई है और उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
