नेपाल में संविधान संशोधन पर बड़ा बयान, आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने संसद में कही यह बात.

Praggya Singh sabal20 August 20263 min read55 viewsWorld
नेपाल में संविधान संशोधन पर बड़ा बयान, आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने संसद में कही यह बात.

नेपाल की राजनीति में इन दिनों संविधान संशोधन के मुद्दे पर चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं, जिस पर अब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि प्रतिनिधि सभा में केवल दो-तिहाई बहुमत होना ही संविधान संशोधन के लिए काफी संख्या नहीं है, और इस संवेदनशील विषय पर सभी पक्षों को बहुत ही सोच-समझकर बात रखनी चाहिए। आम जनता और पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि देश की व्यवस्था को चलाने के लिए कानून और तथ्यों का ध्यान रखना कितना अहम होता है।

संसदीय समिति की बैठक में रखी अपनी बात

प्रतिनिधि सभा की राज्य व्यवस्था तथा सुशासन समिति की हालिया बैठक में गुरुवार को आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने अपनी पार्टी के सांसदों से साफ तौर पर आग्रह किया कि वे सदन में संविधान संशोधन की बात इस तरह से न उठाएं जिससे किसी तरह की गलतफहमी फैले। उन्होंने बताया कि भले ही कुछ साथियों ने यह कहा हो कि वे संविधान में संशोधन करेंगे, लेकिन इसके लिए केवल सदन का दो-तिहाई बहुमत ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब भी इस तरह के बड़े विषयों पर चर्चा की जाए, तो उनकी संवेदनशीलता का पूरा ख्याल रखना बहुत जरूरी होता है। हालांकि, सरकार के साथ मिलकर काम करने और सहयोग देने की बात का उन्होंने पूरी तरह से स्वागत किया है।

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कानून और संविधान का पालन करने पर जोर

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि केवल भावनाओं के आधार पर बातें करना ठीक लग सकता है, लेकिन जमीन पर काम करने के लिए तथ्य, कानून और देश के संविधान—इन सभी महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना ही पड़ता है। रवि लामिछाने ने इस बात पर जोर दिया कि इस समय संविधान के अंदर जो भी व्यवस्था तय की गई है, उसका पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। साथ ही आम जनता के जनादेश को पूरी तरह से पूरा करने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी के प्रति प्रतिबद्ध रहना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान में तय की गई व्यवस्था के अनुसार ही अलग-अलग संवैधानिक निकायों के पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है, और वे सभी संविधान द्वारा दी गई जिम्मेदारियों के मुताबिक ही अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन कर रहे हैं।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाने की अपील

संस्थाओं की प्रतिष्ठा के बारे में बात करते हुए आरएसपी अध्यक्ष ने कहा कि वे इस बात को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं कि किसी भी संस्था की इज्जत या प्रतिष्ठा को कोई नुकसान न पहुंचे। उन्होंने चिंता जताई कि अगर ऐसा होता रहा तो धीरे-धीरे सभी संस्थाओं का क्षरण यानी पतन होना शुरू हो जाएगा। यदि लगातार संस्थाओं को कमजोर किया गया तो अंततः इससे पूरा लोकतंत्र बहुत ज्यादा कमजोर हो सकता है, और यह उनका अपना व्यक्तिगत आकलन है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी के व्यक्तिगत गुस्से या नाराजगी की वजह से लोकतंत्र के मुख्य आधार स्तंभों को गिराने या कमजोर करने की कोशिश की जाती है, तो वे संस्थाएं धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी और एक समय ऐसा आएगा जब उनकी विश्वसनीयता पूरी तरह से शून्य हो जाएगी।

उन्होंने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा कि अंत में यह स्थिति देश के पूरे लोकतंत्र और पूरी व्यवस्था को पूरी तरह से धराशायी कर सकती है। वे ऐसे किसी भी समाज की कल्पना बिल्कुल नहीं करते जहां कोई भी किसी की बात न माने और किसी को भी एक-दूसरे पर जरा सा भी विश्वास न हो। उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि संभव हो तो हमें अपने संशोधनों के जरिए इस व्यवस्था में एक-दो ईंटें और जोड़कर इसे मजबूत बनाना चाहिए, और यदि ऐसा करना मुमकिन न हो तो कम से कम इन महत्वपूर्ण संस्थाओं को टूटने या क्षय होने से बचाकर किसी सही समस्या के समाधान का रास्ता जरूर तलाशना चाहिए। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी आप हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से पढ़ सकते हैं, जहां इसे पत्रकार पंकज दास ने रिपोर्ट किया है।

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