नेपाल सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन देने के तरीके में एक बड़ा बदलाव किया है। अब कर्मचारियों को महीने के अंत तक इंतज़ार नहीं करना होगा, बल्कि उन्हें हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। दक्षिण एशिया में ऐसा करने वाला नेपाल पहला देश बन गया है, जिससे अर्थव्यवस्था में कैश फ्लो बढ़ेगा और निचले स्तर के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

नेपाल में 15 दिन वाली सैलरी व्यवस्था क्यों लागू हुई?

वित्त मंत्रालय ने यह फैसला बाज़ार में पैसों के सर्कुलेशन को बेहतर बनाने के लिए लिया है। पूर्व सरकारी सचिव गोविंदा कुसुम के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पहले से ऐसी व्यवस्था है। इस बदलाव से उन छोटे कर्मचारियों को सबसे ज़्यादा फायदा होगा जो अपनी रोज़ाना की ज़रूरतों के लिए नियमित पैसों पर निर्भर रहते हैं। इससे बाज़ार में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।

किन लोगों को मिलेगा फायदा और क्या हैं कानूनी नियम?

यह व्यवस्था सबसे पहले सिविल सर्वेंट्स के लिए शुरू की गई है। आने वाले समय में नेपाल आर्मी, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और राष्ट्रीय जांच विभाग के कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। हालांकि, इसे पूरी तरह लागू करने के लिए सिविल सर्विस एक्ट में कानूनी बदलाव की ज़रूरत है, क्योंकि अभी के नियम मासिक वेतन की बात करते हैं। सरकार इसके लिए नया कानून या अध्यादेश लाने की तैयारी में है।

किन्हें इस नई सैलरी व्यवस्था से बाहर रखा गया है?

इस नई प्रणाली में शिक्षकों को शामिल नहीं किया गया है, जिसे लेकर नेपाल टीचर्स फेडरेशन में काफी नाराज़गी देखी जा रही है। कई स्थानीय स्तर के शिक्षकों को पहले से ही वेतन मिलने में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, सरकारी समितियों, आयोगों और सार्वजनिक उद्यमों को भी धीरे-धीरे इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.