नेपाल में एलपीजी संकट के बीच पीएम बालेन्द्र शाह ने किया सरकार के कामकाज का बचाव, गिनाईं उपलब्धियां.

नेपाल में रसोई गैस यानी एलपीजी की भारी किल्लत के बीच देश के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपनी सरकार के कामकाज का जोरदार बचाव किया है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए देश की जनता को यह जानकारी दी कि लंबे समय से घाटे में चल रहे सरकारी उद्योगों और संस्थानों को फिर से पटरी पर लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की मुख्य प्राथमिकता राष्ट्रीय उद्योगों को अधिक मजबूत और उत्पादक बनाना है।
सरकारी उद्योगों और संस्थानों में सुधार के दावे
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने बयान में देश के कई बड़े और पुराने संस्थानों में हुए सुधारों का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से सरकारी व्यवस्था में बदलाव लाकर बेहतर परिणाम हासिल किए जा रहे हैं।
- नेपाल ड्रग्स लिमिटेड ने गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज प्रमाणपत्र मिलने के बाद पिछले चार महीनों में 23.8 करोड़ नेपाली रुपये मूल्य की दवाइयों की बिक्री की है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान 30 करोड़ नेपाली रुपये का मुनाफा भी कमाया है।
- लंबे समय से ताले में बंद पड़ी हेटौंडा टेक्सटाइल इंडस्ट्री में अब परीक्षण उत्पादन का काम दोबारा शुरू हो चुका है, जिससे आने वाले समय में रोजगार और उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- नेपाल एयरलाइंस ने पिछले वित्त वर्ष के बीच में कुल 6.27 अरब नेपाली रुपये का भारी-भरकम राजस्व अर्जित किया है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
- डेयरी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने किसानों को दिए जाने वाले पुराने बकाये भुगतान को 72 करोड़ रुपये से घटाकर अब केवल 35 करोड़ रुपये पर ला दिया है। इसके साथ ही इस संस्थान की दैनिक आय भी करीब 60 लाख रुपये से बढ़कर 90 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई है।
एलपीजी संकट पर सीधा जवाब देने से बचे प्रधानमंत्री
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री ने सरकारी कंपनियों की सफलताओं का लंबा चौड़ा लेखा-जोखा पेश किया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने देश में मौजूदा समय में चल रहे गंभीर एलपीजी संकट पर सीधे तौर पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या समाधान नहीं दिया। राजधानी काठमांडू समेत पूरे देश में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडरों की भारी कमी बनी हुई है, जिसकी वजह से आम आदमी को खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर हासिल करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोग सुबह से लंबी लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है।
संसद में उठे कड़े सवाल
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है जब देश की प्रतिनिधि सभा यानी संसद में खुद सत्तारूढ़ दल के सांसदों समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने भी एलपीजी गैस की भारी किल्लत और सरकार की कुल कार्यप्रणाली को लेकर कड़े सवाल खड़े किए हैं। सांसदों ने सरकार से यह सवाल पूछा है कि जब देश में गैस की इतनी बड़ी किल्लत चल रही है तो सरकार इसे दूर करने के लिए कड़े कदम क्यों नहीं उठा रही है। आम जनता भी इस बात से खासी परेशान है कि एक तरफ सरकार उद्योगों के मुनाफे के दावे कर रही है और दूसरी तरफ रसोईघर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है।