नेपाल में एलपीजी गैस की भारी किल्लत, सरकार ने बनाई 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' उपभोक्ताओं को अब मिलेगी राहत.

नेपाल में रसोई गैस यानी एलपीजी की किल्लत से जूझ रहे आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से नेपाल के कई इलाकों में गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही थीं और लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ रहा था। इस गंभीर समस्या को देखते हुए नेपाल सरकार ने अब एक बड़ा कदम उठाया है और 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' (QRT) का गठन किया है। यह टीम सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की समस्याओं को सुलझाने और गैस की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी।
सरकार का सख्त निर्देश और नई व्यवस्था
उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्री गौरी यादव ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए देश में किसी भी कीमत पर लोगों के घरों तक गैस पहुंचाने का निर्देश दिया है। इसी आदेश के तहत एक संयुक्त तंत्र तैयार किया गया है, जिसमें उद्योग मंत्रालय, नेपाल आयल निगम, उद्योग विभाग और गैस व्यवसायियों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह विशेष टीम बुधवार से अपना काम औपचारिक रूप से शुरू कर चुकी है। इसका मुख्य मकसद गैस वितरण में आ रही बाधाओं को तुरंत दूर करना है ताकि किसी भी उपभोक्ता को परेशानी न हो।
कौन-कौन है इस टीम का हिस्सा
सरकार ने इस टीम में विभिन्न विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों और जानकारों को जगह दी है। टीम में उद्योग मंत्रालय से मंगल बिष्ट, नेपाल आयल निगम से इन्दु श्रेष्ठ और उपेन्द्र सुवेदी शामिल किए गए हैं। साथ ही, गैस उद्योग की ओर से आयुस नेपाल और कुलप्रसाद राई को इसमें सदस्य बनाया गया है। यह संयुक्त टीम देश के किसी भी हिस्से में गैस की किल्लत की जानकारी मिलते ही तुरंत समन्वय स्थापित करेगी।
कैसे करें शिकायत और क्या है प्रक्रिया
नेपाल आयल निगम के अनुसार, हाल के दिनों में गैस न मिलने की शिकायतें बढ़ गई थीं, जिसके बाद इस तंत्र को सक्रिय किया गया है। यह टीम ऑफिस समय के दौरान मिलने वाली हर शिकायत को प्राथमिकता के आधार पर निपटाएगी। यदि किसी भी उपभोक्ता को गैस आपूर्ति में समस्या आ रही है, तो वे नेपाल आयल निगम की आधिकारिक हॉटलाइन नंबर 01-5971902 पर संपर्क कर सकते हैं। हिन्दुस्थान समाचार के अनुसार, इस नंबर पर जैसे ही कोई शिकायत दर्ज होगी, क्विक रिस्पॉन्स टीम तुरंत हरकत में आएगी और संबंधित डीलर या व्यवसायी से बात कर गैस पहुंचवाना सुनिश्चित करेगी। सरकार की ओर से उठाया गया यह कदम आम लोगों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है क्योंकि अब उन्हें अपनी समस्या सीधे अधिकारियों तक पहुंचाने का एक औपचारिक जरिया मिल गया है।