नेपाल के थिमी शहर में नए साल के मौके पर सिंदूर जात्रा का शानदार उत्सव मनाया गया। न्यूआर समुदाय के लोगों ने इस मौके पर पूरे शहर को नारंगी रंग में रंग दिया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और विदेशी पर्यटकों ने इस प्राचीन परंपरा का हिस्सा बनकर खुशियां मनाईं।
सिंदूर जात्रा में क्या हुआ और कैसे मनाया गया उत्सव
इस त्योहार के दौरान बालकुमरी मंदिर के चारों ओर 26 से 32 पालकियों को घुमाया गया। श्रद्धालु एक-दूसरे पर नारंगी रंग का सिंदूर मल रहे थे, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे आयोजन में पारंपरिक न्यूवारी धिमे संगीत और नृत्य का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय रहा। यह उत्सव बिस्केट जात्रा का ही एक हिस्सा है जो कई दिनों तक चलता है।
जीभ छिदवाने की परंपरा और अन्य खास बातें
इस उत्सव का एक खास हिस्सा Bode क्षेत्र के श्रेष्ठ परिवार द्वारा जीभ छिदवाने की प्राचीन रस्म है। इस रस्म के लिए व्यक्ति को तीन दिन तक उपवास रखना पड़ता है और इस्तेमाल होने वाली सुई को एक महीने तक तेल में भिगोकर रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह परंपरा बुरी आत्माओं और राक्षसों पर जीत पाने के लिए की जाती है।
नेपाल नए साल और सिंदूर जात्रा की मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 14 और 15 अप्रैल 2026 |
| स्थान | थिमी, नेपाल |
| मुख्य मंदिर | बालकुमरी मंदिर |
| समुदाय | न्यूआर समुदाय |
| मुख्य रंग | नारंगी सिंदूर |
| विशेष रस्म | जीभ छिदवाना (Tongue Piercing) |
